मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परमात्मा की कृपा से मिले जीवन का सदुपयोग करें और अच्छे कार्य करें
योग, चेतना और जीवनशैली पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले के जामली (सेंधवा) स्थित गायत्री धाम में सोमवार की सुबह गायत्री परिवार के सदस्यों के साथ योगाभ्यास किया। इस दौरान उन्होंने योग, आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक विचारों और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को सद्भावना और सत्कर्मों के मार्ग पर चलने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने हम सभी के मन में जो ज्ञान का दीप प्रज्ज्वलित किया है, वह जीवन भर ऊर्जा का स्रोत बना रहे। जब तक हमारा शरीर साथ दे, तब तक हमारे हाथों से अच्छे कर्म होते रहें, मन में सद्भावना बनी रहे और दुर्विचार समाप्त हो जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा के साथ ही आज से वास्तव में दीपावली का शुभारंभ हो गया है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा से हमें जो यह अनमोल जीवन मिला है, उसका सदुपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य का जन्म लेना और जीवन यात्रा को पूर्ण करना, सब ईश्वर की कृपा और निर्धारित समय का हिस्सा है। महाकाल, भगवान श्रीकृष्ण और माँ गायत्री की कृपा से हमें जो जीवन मिला है, उसका अधिकतम सदुपयोग करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के समय का श्रेष्ठतम उपयोग करते हुए अच्छे कार्य करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन एक अनमोल उपहार है और हमें इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। सकारात्मकता और अच्छे कर्म ही हमें सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने भारतीय दर्शन के प्रसिद्ध वैदिक वाक्य ‘यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जो तत्व हमारे शरीर में विद्यमान हैं, उन्हीं का व्यापक स्वरूप ब्रह्मांड में भी दिखाई देता है। प्रकृति, वनस्पति, पंचतत्व और प्राणतत्व का मानव जीवन में विशेष महत्व है।
जिस प्रकार दीपक का प्रकाश अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार हमें अपने जीवन में ज्ञान और सद्भावना का प्रकाश फैलाना चाहिए। यह पर्व हमें रिश्तों को संजोने और एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जीवन में आध्यात्मिक चेतना का विकास हमें आत्मज्ञान की ओर ले जाता है। यह हमें अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने में मदद करता है और हमें सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। आध्यात्मिक चेतना से ही हम जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
यह हमें मुश्किलों का सामना करने की शक्ति देता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने मन को हमेशा अच्छे विचारों से भरा रखना चाहिए और नकारात्मकता को दूर रखना चाहिए। दुर्विचार हमें गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं, इसलिए उनसे बचना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्कर्मों का दीप सतत प्रज्ज्वलित रहना चाहिए, जिसका अर्थ है कि हमें हमेशा अच्छे कार्य करते रहना चाहिए। अच्छे कर्म न केवल हमें आत्मिक संतुष्टि प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के लिए भी कल्याणकारी होते हैं।
