शहडोल जिले के मझगवां गांव के सलैया टोला निवासी बिरमतिया बैगा के लिए देसी बीज केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि उनके पुरखों की पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा की अनमोल धरोहर हैं। वे अपने खेतों में पारंपरिक धान और मोटे अनाज की विभिन्न किस्मों की खेती कर रही हैं। फसल से प्राप्त अनाज का उपयोग परिवार के भोजन में होता है, जबकि सुरक्षित रखे गए बीज अगली फसल तैयार करने में काम आते हैं। बिरमतिया बैगा के खेतों में समा, कुटकी, सिकिया, काकुन, सरैय्या और ठर्री धान जैसी पारंपरिक फसलें उगाई जाती हैं। अलग-अलग मौसम में इन फसलों की खेती करना और उनसे प्राप्त अनाज को सुरक्षित रखना उनके परिवार की पुरानी परंपरा का हिस्सा है। उनके लिए खेत में उगने वाला प्रत्येक अनाज केवल उपज नहीं है, बल्कि उसके साथ परिवार की यादें, पूर्वजों की खेती की पद्धति और वर्षों से चली आ रही खाद्य परंपरा जुड़ी हुई है। बिरमतिया बैगा के परिवार में खेत से प्राप्त अनाज का उपयोग भोजन के लिए किया जाता है। समा, कुटकी, सिकिया और काकुन जैसे अनाज उनके पारंपरिक खानपान का हिस्सा हैं। वहीं सरैय्या और ठर्री जैसी धान की किस्में उनकी खेती में विविधता बनाए रखती हैं। उनके यहां बीज संरक्षण की परंपरा एक मौसम की फसल के साथ समाप्त नहीं होती।
समाचार
बिरमतिया बैगा सहेज रहीं पुरखों की धरोहर
26 अक्टूबर 2026 को 11:48 pm बजे
