भगवान के चरणों में प्रेम का महत्व बताया गया
झाबुआ जिले के थान्दला में श्रीमद्भागवत भक्ति पर्व के अंतर्गत सात दिवसीय श्रीमद्भागवतकथा का आयोजन किया गया। इस कथा में उमेशचन्द्र शर्मा ने भगवान कृष्ण के चरणों में निष्काम प्रेम का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में वैदिक शास्त्रों का सारभूत तत्व निहित है और यह प्रेम केवल तब ही संभव है जब हम प्रभु के चरणों को अपना मानें। कथा के दौरान शर्मा ने नाम महामंत्र का जप और कीर्तन करने की बात की। उनका कहना था कि यह कीर्तन और जप ही हमें भगवान के दिव्य प्रेम की प्राप्ति कराएगा। उन्होंने नाम संकीर्तन की महिमा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह सर्वपापप्रणाशन का माध्यम है। सूतजी महाराज ने शौनकादि ऋषियों को उपदेश देते हुए कहा कि हरे कृष्ण महामंत्र की महिमा का संपूर्ण रूप से वर्णन नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि यह महामंत्र कलिकाल में सभी के लिए जपनीय और कीर्तनीय है। शर्मा ने कथा के विश्रांति की सांध्य वेला में नाम महामंत्र की महानता को उजागर किया। उन्होंने कहा कि भगवान के सभी नाम महिमावंत हैं और उनमें दिव्य शक्ति निहित है। कथा के दौरान भक्तियोग, ध्यान विधि, ज्ञान, कर्म और भक्ति योग का महत्व बताया गया। शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भागवत में नाम स्मरण का महत्व निरूपित किया गया है।

