मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय अब सीवरेज के पानी को एक मूल्यवान संसाधन के रूप में उपयोग करके अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को सीधे आय का जरिया बनाया जाएगा। शहरों से निकलने वाले गंदे पानी को वैज्ञानिक तरीकों से उपचारित करके पुनः उपयोग में लाया जाएगा, जिससे न केवल पेयजल के स्रोतों पर दबाव कम होगा, बल्कि नगर निगमों और नगर पालिकाओं को सीवरेज जल से अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। इस योजना की कार्यान्वयन प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में विभाजित है। पहले चरण में, एसटीपी के माध्यम से सीवेज जल को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार शोधित किया जाएगा। दूसरे चरण में, उपचारित जल की गुणवत्ता और उपयोगिता के आधार पर इसे अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा। इस उपचारित जल का उपयोग उद्योगों, निर्माण परियोजनाओं, उद्यानों, पार्कों और अन्य गैर-पेयजल संबंधी आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा। योजना की सफलता और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, निजी निवेशकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निजी क्षेत्र को एसटीपी के निर्माण, संचालन, रखरखाव और उपचारित जल की आपूर्ति व्यवस्था के विकास में शामिल करने की तैयारी है। इसके बदले में, नगरीय निकायों को जल की बिक्री या अन्य निर्धारित अनुबंध व्यवस्थाओं के माध्यम से आय प्राप्त होगी। बढ़ती शहरी आबादी के साथ पेयजल की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे में, उपचारित सीवरेज जल का पुनः उपयोग स्वच्छ जल की बचत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उद्योगों और निर्माण कार्यों में शुद्ध पानी के बजाय उपचारित जल की उपलब्धता से नगर निकायों की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव कम होगा।
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मध्य प्रदेश निकाय सीवरेज जल को बनाएंगे आय का स्रोत
26 अक्टूबर 2026 को 11:48 pm बजे

मध्य प्रदेश निकाय सीवरेज जल को बनाएंगे आय का स्रोत
