फेस रिकग्निशन सिस्टम से वांछित अपराधियों की पहचान होगी, अलर्ट मिलेगा
सिंहस्थ-2028 की तैयारी के मद्देनजर, भोपाल रेलवे स्टेशन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली सक्रिय कर दी गई है। इस प्रणाली के तहत पांच स्मार्ट कैमरे लगाए गए हैं, जो न केवल भीड़ की निगरानी करेंगे, बल्कि फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के जरिए वांछित अपराधियों की पहचान करने में भी मदद करेंगे। किसी भी व्यक्ति का चेहरा पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज तस्वीरों से मेल खाने पर तत्काल कंट्रोल रूम में अलर्ट भेजा जाएगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को और मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। यह इंटीग्रेटेड सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। एफआरएस तकनीक वाले पांच बुलेट कैमरे स्टेशन के प्रमुख स्थानों पर स्थापित किए गए हैं और सीधे मुख्य सुरक्षा कंट्रोल रूम से जुड़े हैं। यहां चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। सिंहस्थ के दौरान बड़ी श्रद्धालुओं के भोपाल स्टेशन से गुजरने की उम्मीद है, ऐसे में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए यह तकनीक बेहद अहम साबित होगी। बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों का दबाव अचानक बढ़ जाता है। इससे प्लेटफॉर्म, फुटओवरब्रिज, प्रवेश और निकास द्वारों पर भीड़ जमा हो सकती है, जिससे आवाजाही बाधित होने का खतरा रहता है। स्मार्ट कैमरों से मिलने वाली लाइव तस्वीरें कंट्रोल रूम को भीड़ की स्थिति को समझने में मदद करेंगी। ऐसी स्थिति में, भीड़ को नियंत्रित करने, रास्तों को खाली कराने और यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों और रेलवे कर्मचारियों को तुरंत तैनात किया जा सकेगा। इन कैमरों की एक और महत्वपूर्ण भूमिका अपराध नियंत्रण में होगी। सिस्टम में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराए गए वांछित अपराधियों, संदिग्धों और हिस्ट्रीशीटरों के फोटोग्राफ दर्ज किए गए हैं। जब कोई व्यक्ति कैमरे के सामने आता है, तो उसका चेहरा रिकॉर्ड से मेल खाने पर कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलेगा। इसके बाद, सुरक्षा कर्मी उस व्यक्ति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फेस रिकग्निशन मिलान अपने आप में अपराध साबित नहीं करता; पहचान की पुष्टि और आगे की कार्रवाई के लिए सुरक्षा एजेंसियों को अन्य साक्ष्यों की भी जांच करनी होगी। भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों पर बच्चों के परिजनों से बिछड़ने की समस्या भी एक आम चुनौती है। स्मार्ट कैमरों और सुरक्षित रखे गए फुटेज की मदद से ऐसे बिछड़े हुए बच्चों की आवाजाही का पता लगाने में सहायता मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो संबंधित क्षेत्र के फुटेज की जांच की जा सकती है। इससे सुरक्षा बलों को घटनाक्रम को बेहतर ढंग से समझने और समय पर कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
