रेल यात्रा का किराया 45 रुपये निर्धारित किया
धार जिले में नई रेल सुविधा के उद्घाटन के बाद ट्रैक पर रखे गए लोहे के सामान और गिट्टी निकालने की घटनाओं ने रेलवे की सुरक्षा को चुनौती दी है। टांडा रोड से डेकाकुंड के बीच कई स्थानों पर ऐसी गतिविधियां सामने आई हैं, जो न केवल बच्चों की उत्सुकता से जुड़ी हैं, बल्कि कुछ लोगों की लापरवाही का भी परिणाम हैं। इस स्थिति ने रेलवे प्रबंधन को गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, जिस पटरी पर ट्रेनें दौड़ाई जा रही हैं, उसी पटरी पर बच्चों द्वारा लोहे का सामान रखकर यह देखने का प्रयास किया जा रहा है कि ट्रेन के गुजरने पर क्या होगा। ऐसे में कई बच्चे पटरी के आसपास खेलते देखे जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा का बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। यह स्थिति न केवल ट्रेनों के पहियों और वैगनों को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि रेल संचालन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है। सुरक्षा की दृष्टि से जरूरत पड़ने पर ट्रेन की गति 45 किमी प्रति घंटे से घटाकर करीब 30 किमी प्रति घंटे तक करनी पड़ सकती है। यदि ऐसी गतिविधियां जारी रहीं, तो रेलवे को संचालन में बदलाव करने पर भी विचार करना पड़ सकता है। धार-छोटा उदयपुर रेल परियोजना के अंतर्गत उद्घाटन के समय लाए गए आधुनिक रेल वैगन को भी मेंटेनेंस और सुधार कार्य के लिए भेजा गया है। इस कारण अब पुरानी ट्रेन नई मेमो कोच (डिब्बे) टांडा क्षेत्र में संचालन कर रही है। रेलवे ने इस स्थिति को देखते हुए टांडा रोड से देखा कुंड के बीच आने वाले गांवों, ग्राम पंचायतों और स्कूलों में जागरूकता अभियान शुरू किया है। रेलवे कर्मचारी बच्चों और ग्रामीणों को समझा रहे हैं कि पटरी पर कोई वस्तु रखना या ट्रैक के नीचे से गिट्टी निकालना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। नई रेल सुविधा के उद्घाटन के बाद क्षेत्र के बच्चों में उत्सुकता भी दिखाई दे रही है। हालांकि, इस उत्सुकता के कारण उत्पन्न हो रहे खतरों को खत्म करने के लिए रेलवे ने जागरूकता बढ़ाने का कदम उठाया है। वर्तमान में टांडा रोड से वडोदरा तक रेल सुविधा आदिवासी क्षेत्र के लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। करीब 45 रुपये में यात्रा की सुविधा मिलने से मजदूरों और ग्रामीण यात्रियों को विशेष लाभ मिल रहा है। हालांकि, रेलवे सूत्रों का कहना है कि नई रेल परियोजनाओं में शुरुआत में इस तरह की घटनाएं उत्सुकता के कारण सामने आती हैं। यदि पटरी और रेल वैगन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां जारी रहीं, तो इसका असर रेल सुविधा पर पड़ सकता है।

