उज्जैन में शाही मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग जमा हो गए हैं। रविवार रात या सोमवार सुबह से धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है, जिसके खिलाफ मुस्लिम समाज ने विरोध शुरू कर दिया है। शाही मस्जिद, जो कि वर्ष 1390 में बनी है, शहर के प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक मानी जाती है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि प्रशासन को यह समझना चाहिए कि धार्मिक स्थलों को नहीं तोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी शहर में सड़क चौड़ीकरण हुआ है, लेकिन धार्मिक स्थलों को छोड़कर यह कार्य किया गया है। इस बीच, नया वक्फ अमेंडमेंट एक्ट लागू होने के कारण कलेक्टरों और सरकार को जो अधिकार दिए गए हैं, उनका मकसद मुस्लिम समुदाय से धार्मिक स्थलों को छीनना प्रतीत होता है। इस एक्ट का उद्देश्य साफ नजर आ रहा है, जिससे मुस्लिम समाज में चिंता बढ़ गई है। शनिवार रात से ही मस्जिद के अंदर और बाहर लोग एकत्रित हो गए थे और नारेबाजी कर रहे थे। शाही मस्जिद के इमाम ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे धार्मिक स्थलों को छोड़कर कार्य करें, जिससे समाज हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार है। प्रशासन ने संभावित कार्रवाई को देखते हुए अतिरिक्त फोर्स बुला लिया है। मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए गए हैं और पुलिस बल व आरएएफ की टुकड़ी तैनात की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि चौड़ीकरण की कार्रवाई मास्टर प्लान और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। मुस्लिम समाज ने पहले इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका लगाई थी, लेकिन करीब तीन दिन पहले हाईकोर्ट ने याचिका को निरस्त कर दिया था।
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ओवैसी बोले- मस्जिदें नहीं तोड़ी जा सकतीं
28 सितंबर 2026 को 12:49 am बजे

ओवैसी बोले- मस्जिदें नहीं तोड़ी जा सकतीं
