प्रदूषण को नियंत्रित करने का एक्शन प्लान तैयार
भोपाल में वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 9 साल में राजधानी भोपाल में लगभग 11 लाख वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है। इस बढ़ती संख्या के कारण प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राजधानी में सुगम बस परिवहन सेवा की शुरुआत करते हुए बताया कि देश में वाहनों का प्रदूषण के लिए 40% हिस्सेदारी है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि वाहनों की बढ़ती संख्या वायु और ध्वनि प्रदूषण को बढ़ा रही है। 2021 में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक कार्य-योजना तैयार की गई थी, लेकिन उस पर प्रभावी अमल आज तक नहीं हो सका। इस योजना में 15 साल पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने, पीयूसी नियमों का कड़ाई से पालन करने और डीजल वाहनों पर सख्त कार्रवाई करने जैसे उपाय शामिल थे। शहर में हर साल बढ़ती वाहनों की संख्या के कारण ध्वनि और वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में शहर की सड़कों पर 21 से लेकर 23 लाख दो और चार पहिया वाहनों का दबाव है। शहर में 2017 में कुल वाहनों की संख्या 10 लाख थी, जो 2021 में बढ़कर 16 लाख हो गई। इसके बाद 2021 से 2025 तक हर साल औसतन 1 लाख वाहनों का इजाफा होता रहा है। इसके अलावा, दूसरे राज्यों और शहरों से आने वाले वाहनों का भी प्रदूषण पर असर पड़ता है। इनमें लगभग 2 लाख वाहन शामिल हैं, जो भोपाल की आबोहवा को और बिगाड़ रहे हैं। विशेष रूप से ठंड के मौसम में प्रदूषण की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। पिछले साल दिसंबर में, पीएम 2.5 का स्तर कई क्षेत्रों में 300 और इससे ऊपर पहुंच गया था। यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण, पिछले 5 सालों में प्रदूषण की स्थिति बिगड़ती गई है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

