मतदाता सूची में केवल योग्य मतदाताओं के नाम शामिल होने चाहिए, यह एक निर्विवाद सत्य है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचन आयोग ने विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण, जिसे एसआइआर कहा जाता है, के माध्यम से लाखों अपात्र मतदाताओं को सूची से बाहर किया। हालाँकि, हाल के दिनों में मतदाता सूची से संबंधित जो विवरण सामने आ रहे हैं, वे इस पूरी प्रक्रिया में व्याप्त बहुस्तरीय लापरवाही की ओर इशारा करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि बहुत से योग्य मतदाताओं को भी सूची से बाहर कर दिया गया। इसी क्रम में, उत्तर प्रदेश से एक और गड़बड़ी का खुलासा हुआ है, जिसने एसआइआर की शुचिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। विधान परिषद चुनावों के लिए तैयार की गई मतदाता सूची में कई मतदाताओं के नाम अत्यंत विचित्र तरीके से दर्ज पाए गए। उदाहरण के लिए, राम हित यादव जैसे मतदाता का नाम बदलकर 'राम ने यादव को मारा' जैसा कुछ लिख दिया गया। जब इस तरह के नामों में विचित्र विसंगतियों के मामले ने तूल पकड़ा, तो आयोग की ओर से सफाई आई कि यह एक तकनीकी त्रुटि और अनुवाद की गड़बड़ी के कारण हुआ। यह सवाल उठता है कि जिस मतदाता सूची की शुचिता को निर्वाचन आयोग प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर एसआइआर को आवश्यक बता रहा है, उसी के समानांतर विधान परिषद चुनावों में मतदान करने वाले मतदाताओं के नामों में ऐसी गड़बड़ी को कैसे देखा जाएगा। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के ही पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में 10,470 प्रविष्टियों में अनियमितता का मामला भी सामने आया है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि इस तरह की त्रुटियों का हवाला देकर कई राज्यों के लाखों मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया, जबकि इसकी जड़ में प्रक्रिया या तंत्र की खामी थी। पश्चिम बंगाल में, अपीलीय न्यायाधिकरण में दावा पेश करने के बाद, पहले अवैध घोषित किए गए नब्बे प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को वैध पाया गया। यह गंभीर चिंता का विषय है कि यदि निर्वाचन आयोग के अपने तंत्र की लापरवाही या गलती के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित रह गए, तो इसकी भरपाई कैसे होगी और इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? यह स्थिति मतदाता सूची की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गहरा संदेह पैदा करती है। आयोग को न केवल इन त्रुटियों की गहन जांच करनी चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाने चाहिए। उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों पर सख्ती दिखाते हुए, 10 अप्रैल के बाद भरे गए सभी मतदाता फॉर्म का ऑडिट किया जाएगा। यह कदम मतदाता सूची की शुचिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस ऑडिट के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या कोई और अनियमितता हुई है और यदि हुई है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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यूपी में मतदाता सूची में गड़बड़ी: एसआइआर की शुचिता पर उठे सवाल
26 अक्टूबर 2026 को 11:48 pm बजे

यूपी में मतदाता सूची में गड़बड़ी: एसआइआर की शुचिता पर उठे सवाल
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