राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को सीहोर नगर में उत्साह और उमंग के साथ एक भव्य पथ संचलन निकाला गया। नगर के बड़ा बाजार में एकत्रीकरण के साथ प्रारंभ हुए इस पथ संचलन में स्वयंसेवकों ने अनुशासनबद्ध तरीके से कदम मिलाकर नगर के प्रमुख मार्गों से संचलन किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य संगठन, अनुशासन, सामाजिक एकता और समरसता का संदेश देना था। पथ संचलन में कुबेरेश्वर धाम, सीहोर के पंडित प्रदीप जी मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक विमल जी गुप्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि पंडित प्रदीप जी मिश्रा ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए समाज को एकजुट रहने का संकल्प दिलाया। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में सामाजिक समरसता के महत्व को रेखांकित किया। समाज में परस्पर सद्भाव, एकता और समरसता के भाव को मजबूत बनाने का संदेश इस अवसर पर प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक का योगदान महत्वपूर्ण है और संघ इसी दिशा में कार्य कर रहा है। मुख्य वक्ता प्रांत प्रचारक विमल जी गुप्ता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक स्वयंसेवक की भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने संघ की यात्रा और उसके कार्यों के संदर्भ में स्वयंसेवकों के दायित्वों को महत्वपूर्ण बताया। उनके उद्बोधन का केंद्र वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका और समाज के प्रति उनके उत्तरदायित्व का बोध रहा। विमल जी गुप्ता ने कहा कि आज देश अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है और इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वयंसेवकों का संगठित और अनुशासित होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्वयंसेवकों को समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने व्यक्तिगत जीवन में संघ के मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए और समाज के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। बड़ा बाजार से प्रारंभ हुआ पथ संचलन नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। इस दौरान स्वयंसेवक निर्धारित अनुशासन के साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े। संचलन ने नगर में संगठनात्मक अनुशासन और सामूहिकता का दृश्य प्रस्तुत किया। मार्ग में उपस्थित लोगों ने भी स्वयंसेवकों के इस अनुशासित मार्च को देखा और उनकी सराहना की। इस पथ संचलन ने नगर में एक सकारात्मक माहौल बनाया और लोगों को संघ के उद्देश्यों और कार्यों के बारे में जागरूक किया। स्वयंसेवकों की वेशभूषा, उनका अनुशासन और उनका उत्साह देखते ही बन रहा था। यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को और भी यादगार बनाने में सहायक सिद्ध हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित इस पथ संचलन ने सामाजिक समरसता, एकजुटता और स्वयंसेवकों के दायित्वों से जुड़े संदेश को प्रमुखता से सामने रखा। कार्यक्रम में अतिथियों के उद्बोधन और स्वयंसेवकों के अनुशासित संचलन के माध्यम से समाज के प्रति संगठनात्मक प्रतिबद्धता का भाव व्यक्त हुआ। कुबेरेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष समाज के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे सामाजिक समरसता और राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प को और मजबूत करें। उन्होंने अपने प्रवचन में समाज में व्याप्त विभिन्न कुरीतियों पर प्रकाश डाला और उनसे मुक्ति पाने के उपायों पर भी चर्चा की। पंडित मिश्रा ने कहा कि आज के युग में जहां भौतिकतावाद बढ़ रहा है, वहीं हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी नहीं भूलना चाहिए। संघ हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने का कार्य कर रहा है। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ मिलकर काम करें और सभी को साथ लेकर चलें। प्रांत प्रचारक विमल जी गुप्ता ने अपने उद्बोधन में संघ के इतिहास और उसके द्वारा किए गए कार्यों का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार संघ ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्वयंसेवकों को वर्तमान समय की चुनौतियों के प्रति सजग रहने और राष्ट्रहित में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। विमल जी गुप्ता ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही देश का भविष्य है और यदि वे संगठित और अनुशासित होकर कार्य करें तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने संघ की शाखाओं में संचालित होने वाली विभिन्न गतिविधियों का भी उल्लेख किया, जो स्वयंसेवकों को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सक्षम बनाती हैं। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने विभिन्न प्रकार के घोष और देशभक्ति के नारे लगाए, जिससे वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया। स्वयंसेवकों की जोशीली आवाजें और उनके कदमताल ने उपस्थित जनसमूह में भी उत्साह का संचार किया। यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक था और इसने सभी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराया। स्वयंसेवकों के परिवारों ने भी इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने प्रियजनों के साथ इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बने।
समाचार
सीहोर में आरएसएस ने शताब्दी वर्ष पर निकाला भव्य पथ संचलन, स्वयंसेवकों ने दिखाया अनुशासन
26 अक्टूबर 2026 को 11:48 pm बजे
सीहोर में आरएसएस ने शताब्दी वर्ष पर निकाला भव्य पथ संचलन, स्वयंसेवकों ने दिखाया अनुशासन
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