9 लाख के प्रोजेक्ट पर हुआ काम
पांढुर्णा जिले की पिपला नगर परिषद में ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को सरकारी अवकाश के दिन नगर परिषद के स्कूल शिक्षा विभाग के भवन को तोड़ने का काम किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस काम के लिए बिजली की आपूर्ति नगर परिषद कार्यालय से ली गई, जबकि छुट्टी होने के कारण कार्यालय में कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। इस भवन में एक कमरा छोड़कर कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रोजेक्ट चल रहा है, जिस पर लगभग 9 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। ठेकेदार ने इस निर्माण कार्य के लिए नगर परिषद कार्यालय से बिजली का अवैध रूप से उपयोग किया। यह मामला तब प्रकाश में आया जब स्थानीय निवासियों ने इस पर आपत्ति जताई। नियमानुसार, किसी भी निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार को अलग से बिजली कनेक्शन लेना चाहिए था या अस्थायी व्यवस्था के लिए संबंधित विभाग से विधिवत अनुमति लेनी चाहिए थी। इस मामले में शिकायतकर्ताओं प्रवीण महेश्वरी और उमेश गोहे ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में नगर परिषद कार्यालय से ठेकेदार को बिजली उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद, ठेकेदार खुलेआम सरकारी कार्यालय से बिजली लेकर अपना काम कर रहा है, जो नियमों के पूरी तरह विरुद्ध है। यह स्पष्ट रूप से सरकारी नियमों का उल्लंघन है। जब इस संबंध में पिपला सीएमओ डीपी साहू से बात की गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया। सीएमओ साहू ने स्वीकार किया कि उन्होंने ही ठेकेदार को नगर परिषद कार्यालय से बिजली लेने और निर्माण कार्य कराने की अनुमति दी थी। उनकी इस अनुमति ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है। सीएमओ की इस स्वीकारोक्ति से यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है? क्या उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया? यह भी जांच का विषय है कि क्या इस तरह की अनुमति देने का अधिकार सीएमओ को है। सरकारी कार्यालय की बिजली का इस तरह दुरुपयोग न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि यह सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी मामला है। इस घटना ने पांढुर्णा की पिपला नगर परिषद में चल रहे निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। स्थानीय निवासी इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

