सीहोर में शरद पूर्णिमा महोत्सव बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया, जिसमें 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर, विठलेश सेवा समिति द्वारा 30 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशेष भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई थी। भक्तों ने विधि-विधान से भगवान के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया। पूरे आयोजन स्थल पर भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण छाया रहा। महोत्सव के दौरान, प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को कर्म की महत्ता, उत्तम आचरण और निस्वार्थ सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि जब कोई व्यक्ति अपना निर्धारित कार्य पूरी निष्ठा और बिना किसी अहंकार के संपन्न करता है, तो उसका कर्म स्वयं ही भक्ति का एक रूप धारण कर लेता है। पंडित मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि केवल धार्मिक अनुष्ठान ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति अच्छे कर्म करना और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता दिखाना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्म के बिना भक्ति को पूर्णता प्राप्त नहीं होती, इसलिए जीवन में अच्छे कर्म और सेवा भाव को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी से करना चाहिए और उनसे कभी मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं और समृद्धि की कामना करने के बजाय, अपने चरित्र और आचरण को बेहतर बनाने का निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि दूसरों के प्रति दया, विनम्रता और सहयोग की भावना रखना भी भक्ति का ही एक महत्वपूर्ण अंग है। पंडित मिश्रा ने चेतावनी दी कि अहंकार और ईर्ष्या जैसे दुर्गुण व्यक्ति को उसके जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटका सकते हैं। इसलिए, जीवन में सत्य, प्रेम और सदाचार के सिद्धांतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। ईश्वर में अटूट विश्वास रखते हुए अपने सभी दायित्वों का निर्वहन करते रहना चाहिए। अच्छे कर्मों और दूसरों के कल्याण का ध्यान रखने से ही जीवन में भक्ति के वास्तविक अर्थ और महत्व को समझा जा सकता है। महोत्सव के दौरान, उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए विशेष भोजन प्रसादी का वितरण किया गया, जिसमें स्वादिष्ट खिचड़ी, पौष्टिक रोटी-सब्जी, नमकीन और मिष्ठान्न नुक्ती शामिल थे। समिति के समर्पित सदस्यों और सेवादारों ने इस सेवा कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सेवा कार्य में विठलेश सेवा समिति के प्रमुख सदस्य, जैसे पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला, और अन्य सेवादार भी सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिन्होंने श्रद्धालुओं की सेवा में अपना योगदान दिया।
यह महोत्सव इसी भावना का प्रतीक था। कुल मिलाकर, सीहोर में शरद पूर्णिमा महोत्सव एक सफल आयोजन रहा, जिसने 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भक्ति और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। इस आयोजन ने धार्मिकता, कर्मठता और सामाजिक समरसता के महत्व को रेखांकित किया।
