महर्षि वाल्मीकि के विचार और जीवन मूल्य आज भी समाज को एकता, सद्भाव और परस्पर बंधुत्व की प्रेरणा देते हैं। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण संपूर्ण मानवता को सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक समरसता का मार्ग दिखाती है। यह बात भोपाल की महापौर मालती राय ने सोमवार को मानस भवन में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा आयोजित वाल्मीकि जयंती प्रकटोत्सव एवं समरसता सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज के सामाजिक सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में किए गए योगदान की सराहना की जानी चाहिए। समाज के उत्थान और जनकल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं। सम्मेलन में वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए समाज के सर्वांगीण विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम में समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वाल्मीकि समाज के 15 सामाजिक कार्यकर्ताओं को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में दिनेश भारती, आशा पारोचे, ब्रजेश टांक, विरेन्द्र धोलपुरे, आरती नरवारे, दुलीचंद ऊंटवाल, जयप्रकाश खरे, संजय डुमाने, बहन छाया वाल्मीकि, बहन गीता वाल्मीकि, बहन वन्दना खरे, बहन रेखा धोलपुरिया, बहन संगीता राजौरिया, बहन अंजना घावरी एवं भाई मुकेश वाल्मीकि शामिल हैं। इन कार्यकर्ताओं ने अपने कार्यों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मानस भवन में आयोजित इस सम्मेलन में भोपाल एवं आसपास के क्षेत्रों से आए वाल्मीकि समाज के 750 से अधिक नागरिकों और गणमान्यजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस विशाल जनसमूह की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। नागरिकों ने महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का माहौल भक्तिमय और प्रेरणादायक रहा। अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के विचारों, आदर्शों और संदेशों को जन- जन तक पहुंचाना तथा समाज में समरसता, समानता, सद्भाव और सामाजिक एकता की भावना को सुदृढ़ करना है। यह आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सेतु का काम करेगा और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देगा। विभाग ने इस तरह के आयोजनों को भविष्य में भी जारी रखने की बात कही है। सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने, सभी वर्गों के बीच परस्पर सम्मान एवं सहयोग की भावना विकसित करने तथा महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वाल्मीकि के उपदेश केवल एक समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रासंगिक हैं।
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वाल्मीकि जयंती पर समरसता सम्मेलन: 15 सामाजिक कार्यकर्ता सम्मानित
26 अक्टूबर 2026 को 11:48 pm बजे

वाल्मीकि जयंती पर समरसता सम्मेलन: 15 सामाजिक कार्यकर्ता सम्मानित
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