भोपाल मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप पर 13 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। अब नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) विभाग इन आपत्तियों की छंटनी और सुनवाई की तैयारी में जुट गया है। आपत्तियों में सबसे बड़ा मुद्दा बड़े तालाब के कैचमेंट, ग्रीन बेल्ट और कृषि भूमि के प्रस्तावित भू-उपयोग में बदलाव का है। विभाग पहले आपत्तियों को छांटेगा, जिसके बाद करीब एक महीने बाद सुनवाई शुरू होने की संभावना है। आपत्तियों में करीब 60 प्रतिशत बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट और कृषि भूमि के प्रस्तावित उपयोग से संबंधित हैं। ग्रामीणों और किसानों को आशंका है कि उनकी जमीन को रिवर फ्रंट, वन क्षेत्र या ग्रीन बेल्ट में शामिल करने से खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसी मुद्दे पर 68 गांवों के नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद 78 गांवों के ग्रामीण टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। विरोध का मुख्य कारण यह मांग है कि जमीन के वर्तमान उपयोग, स्थानीय आबादी और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर भू-उपयोग तय किया जाए। बड़े तालाब के किनारे बसे खानूगांव में भी प्रस्तावित भू-उपयोग को लेकर विरोध सामने आया है। स्थानीय निवासियों ने गांव के अधिकांश खसरों को लेक फ्रंट ग्रीन बेल्ट में शामिल करने पर आपत्ति जताई है। खानूगांव निवासी सैयद फहीमुद्दीन ने दावा किया कि यह करीब 215 वर्ष पुरानी आबादी है, जिसे रियासतकाल में बसाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि क्षेत्र में पंपिंग स्टेशन सहित बुनियादी सुविधाएं विकसित हैं और पहले यह क्षेत्र अर्बन सीलिंग के तहत आवासीय रहा है। उन्होंने तालाब के लिए 50 मीटर का कैचमेंट छोड़कर खानूगांव को आवासीय श्रेणी में रखने की मांग की है। मास्टर प्लान के प्रारूप को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने योजना को अव्यवहारिक बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें बढ़ती आबादी की जरूरतों के मुकाबले वाहनों और सडक़ परिवहन को अधिक महत्व दिया गया है।
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भोपाल मास्टर प्लान: 13 हजार आपत्तियों पर टीएंडसीपी करेगा छंटनी और सुनवाई
26 अक्टूबर 2026 को 11:48 pm बजे
