अगस्त में दर्ज शिकायतों का निराकरण अब भी लंबित है
भोपाल में इस समय 20 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। इनमें से 13,190 का निराकरण किया गया है, लेकिन 3628 शिकायतें अब भी अटकी हुई हैं। हेल्पलाइन पर 50 दिन पुरानी शिकायतें एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। अगस्त में आईं 3628 शिकायतों का समाधान नहीं हो पाया है, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कलेक्टर कार्यालय में एक समीक्षा बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी सुमित पांडेय ने लंबित शिकायतों का गहन विश्लेषण किया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को केवल औपचारिकता के तौर पर बंद नहीं किया जा सकता। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण करना आवश्यक है। लंबे समय से लंबित शिकायतों का आंकड़ा प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। इस स्थिति में अब अधिकारियों को केवल लंबित शिकायतों की संख्या कम करने के बजाय शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान करने पर जोर दिया गया है। खासकर 50 दिन से अधिक पुरानी शिकायतों की संख्या को देखते हुए विभागवार समीक्षा और वास्तविक समाधान पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। जन विश्वास शिविर से प्राप्त शिकायतों को भी तय समय-सीमा में निराकृत करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, शिकायतों के निराकरण के मामले में भोपाल 50वें स्थान पर है, जो कि चिंता का विषय है। इस महीने भोपाल जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर 16,818 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती हैं। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शिकायतों का वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। अब आंकड़े घटाने के साथ समाधान की गुणवत्ता भी कसौटी बन गई है। भोपाल में लंबित शिकायतों का आंकड़ा कम करने के साथ प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि शिकायतों का निराकरण केवल पोर्टल पर दर्ज प्रक्रिया तक सीमित न रहे। इस स्थिति के बीच, अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे सेवा संकल्प अभियान की गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करें। जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों का प्रमाणिक डाटाबेस उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। अगस्त में दर्ज शिकायतों की स्थिति सबसे अहम है।
