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मध्य प्रदेश पंचायत सचिव संगठन के लिए बड़ी राहत की खबर है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने पंचायत सचिवों के वेतनमान से संबंधित मामले में दायर रिट अपील (डब्ल्यूए-112/2025) को खारिज कर दिया है। न्यायालय के इस फैसले को पंचायत सचिवों की महत्वपूर्ण कानूनी जीत माना जा रहा है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पंचायत सचिवों की नियुक्ति दिनांक से तीन वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण होने पर 2200-50-3000-70-3700 का वेतनमान एवं नियमानुसार भत्ते देय होंगे। यह व्यवस्था 4 सितंबर 2008 के आदेश तथा वर्ष 2011 के नियमों में प्रावधानित है। उच्च न्यायालय ने कहा कि 10 जनवरी 2024 को पारित पूर्व आदेश में कोई त्रुटि नहीं है, इसलिए उसे बरकरार रखते हुए रिट अपील खारिज की जाती है। न्यायालय के अनुसार पंचायत राज संचालनालय अथवा सचिव को राज्य सरकार के आदेश में बदलाव करने या उसकी अलग व्याख्या करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने 4 सितंबर 2008 के आदेश का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि पंचायत सचिव के पद पर नियुक्ति के बाद तीन वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर वेतनमान लागू होगा। वर्ष 2011 के नियमों की अनुसूची-1 में भी स्पष्ट प्रावधान है कि प्रारंभिक तीन वर्षों तक 1600 रुपये निश्चित मानदेय एवं 250 रुपये भत्ता देय होगा। संगठन के संघर्ष को मिली सफलता। इस महत्वपूर्ण कानूनी जीत के पीछे जबलपुर एवं पनागर जनपद के पंचायत सचिवों का संघर्ष और अधिवक्ता राजमणि मिश्रा द्वारा न्यायालय में की गई प्रभावी पैरवी महत्वपूर्ण रही। इस कानूनी लड़ाई में सचिव साथियों संतोष तिवारी, अरविंद शुक्ला, राम मनोहर उपाध्याय, सोनलाल पटेल, मोहम्मद सलीम, राजेश तिवारी, सुधा नायर, रंजन झाझरिया, प्रकाश लोढ़ी, गोपाला लोढ़ी, विजय खड़इया, रूपनारायण दुबे, रामनारायण उरमलिया एवं जेपी पांडे सहित अन्य साथियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। पंचायत सचिवों ने इस निर्णय को अपने अधिकारों की लड़ाई में बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसे संगठन की एकजुटता और निरंतर संघर्ष का परिणाम बताया। न्यायालय के इस फैसले से उन सभी पंचायत सचिवों को लाभ मिलेगा जिन्होंने तीन वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है। यह निर्णय भविष्य में भी पंचायत सचिवों के सेवा नियमों और वेतनमानों को लेकर स्पष्टता प्रदान करेगा। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत सचिवों को तीन साल की सेवा पूरी करने पर 2200-50-3000-70-3700 का वेतनमान मिलेगा, जो कि 4 सितंबर 2008 के आदेश और 2011 के नियमों के अनुरूप है। यह आदेश 10 जनवरी 2024 के पूर्व आदेश की पुष्टि करता है, जिसमें कोई त्रुटि नहीं पाई गई। न्यायालय ने कहा कि पंचायत राज संचालनालय या सचिव को राज्य सरकार के आदेशों में बदलाव करने या उनकी अलग व्याख्या करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने न्यायालय में पंचायत सचिवों के अधिकारों और सेवा शर्तों का मजबूती से पक्ष रखा।
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