भारत को अमेरिकी टैरिफ के कारण नई आर्थिक चुनौतियां
भारत को अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लागू कर दिए हैं, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 4.54 प्रतिशत और बढ़ गए हैं। यदि रूस पर लगे सैंक्शन एक्ट को लागू किया गया, तो भारत को रूस से कच्चे तेल और गैस के आयात पर 8.96 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। इस स्थिति में भारत को अपने निर्यात के लिए नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख निर्यात गंतव्य है, जहां 2025 में भारत ने अपने कुल निर्यात का 60 प्रतिशत अकेले अमेरिका को किया था। ऐसे में भारत को वैकल्पिक बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की आवश्यकता है। भारत के सामने यह दुविधा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से आयात जारी रखे या अमेरिका जैसे बड़े निर्यात बाजार में पहुंच बनाए रखे। दोनों विकल्पों के अपने आर्थिक परिणाम हैं और भारत को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। हालांकि निर्यात में विविधता लाना कोई रामबाण इलाज नहीं है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। भारत-यूरोपीय संघ, भारत-ब्रिटेन और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए व्यापार समझौते भारतीय निर्यात के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। अमेरिका का सैंक्शनिंग रशिया एक्ट भारत की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है।

