मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण -111 (जीईसी-111) योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत किया जाएगा, जिससे 135 गीगावॉट तक की नवकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और पॉवर इवैक्यूएशन संभव हो सकेगा। यह कदम स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए इस निर्णय को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री यादव ने इस योजना की मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करेगी, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच रिन्यूएबल एनर्जी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना संभव होगा। इस योजना के तहत 50 जीडब्ल्यूएच बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की स्थापना भी की जाएगी। इससे ग्रिड की क्षमता में वृद्धि होगी, जो ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा। इस प्रकार की पहलें न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में बल्कि रोजगार के नए अवसरों को भी जन्म देंगी। मुख्यमंत्री यादव ने इस परियोजना को लेकर कहा कि यह एक ऐतिहासिक पहल है, जो स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में सहायक होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि यह योजना जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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मुख्यमंत्री यादव ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना को दी मंजूरी
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