त्योहारों पर मिठाई और नमकीन की मांग में अचानक वृद्धि होते ही मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। ज्यादा मुनाफा कमाने की चाहत में कुछ व्यापारी मावा, पनीर और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट करते हैं, तो कहीं पुराने मावे और एक्सपायरी रेडी-टू- मिक्स उत्पादों के इस्तेमाल की आशंका रहती है। खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित रूप से छापे मारकर नमूने तो लेता है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में महीनों का लंबा समय लग जाता है। इस देरी के कारण की गई कार्रवाई का असर काफी सीमित रह जाता है। तब तक संबंधित खाद्य सामग्री बाजार में बिक चुकी होती है और अनजाने में उपभोक्ता उसकी कीमत अपनी सेहत से चुका चुके होते हैं। इस बार दिवाली का त्योहार करीब आ चुका है, लेकिन न तो मिठाई एवं नमकीन की बिक्री ने रफ्तार पकड़ी है, और न ही नमूने जांचने वाली खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं अपनी पूरी क्षमता से काम शुरू कर सकी हैं। 5 करोड़ की लागत से बनी यह प्रयोगशालाएं महीनों बाद भी रिपोर्ट देने में सक्षम नहीं हैं। इससे त्योहार के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थों की खपत की आशंका बनी हुई है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा त्योहारों के मद्देनजर त्योहारी सीजन के चलते अचानक जांच एवं छापेमारी की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की जांच लगातार जारी है। असुरक्षित पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को तत्काल नष्ट कराया जा रहा है। जांच रिपोर्टों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले आरोपितों पर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
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मिलावट का खतरा, लैब रिपोर्ट में देरी
25 अक्टूबर 2026 को 11:53 pm बजे

मिलावट का खतरा, लैब रिपोर्ट में देरी
