मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर चुकीं दुर्गा सिंह ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हार नहीं मानी। शहडोल जिले के छतवई गांव की दुर्गा ने अपने हुनर को आजीविका का माध्यम बनाया है और अब लकड़ी पर कलाकारी यानी काष्ठ शिल्प के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। वर्ष 2019 में एमए करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें पढ़ाई और तैयारी में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियों को समझते हुए उन्होंने आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न हुनर सीखने का फैसला किया। दुर्गा ने सिलाई-बुनाई और ब्यूटी पार्लर का काम भी सीखा, लेकिन उनसे अपेक्षित आमदनी नहीं हो पा रही थी। प्रशिक्षण की लागत भी उनके लिए एक चुनौती थी। नए अवसरों की तलाश जारी रखते हुए वह छतवई स्थित हथकरघा एवं हस्तशिल्प केंद्र पहुंचीं, जहां उन्होंने गोंडी चित्रकला का प्रशिक्षण लिया। वर्तमान में वह इस कार्य से प्रतिमाह लगभग 6 से 8 हजार रुपये कमा रही हैं।
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एमए पास दुर्गा ने हुनर से संवारा भविष्य
25 अक्टूबर 2026 को 11:54 pm बजे
एमए पास दुर्गा ने हुनर से संवारा भविष्य
