जांच में 30 से अधिक संदिग्ध नियुक्तियों की भी पहचान की गई है
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से डाक विभाग में नौकरी प्राप्त करने वाले आठ कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। जांच में फिलहाल आठ अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जबकि 30 से अधिक संदिग्ध नियुक्तियां भी जांच के दायरे में हैं। डाक विभाग में जिन कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति की गई थी, उनमें मानवेंद्र सिंह, राजा बाबू अहिरवार, सौरभ शर्मा, प्रदीप कुमार और नयन कुमार शामिल हैं। इन सभी कर्मचारियों को विभिन्न स्थानों पर पदस्थ किया गया था, जैसे कुंडम, पाटन, उमरिया-बरेला और शाहपुरा। सीबीआई ने जबलपुर और कटनी में इन आरोपियों को पकड़ा है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई अंकसूचियां संबंधित शैक्षणिक बोर्डों द्वारा जारी नहीं की गई थीं। डाक विभाग ने इन सभी के दस्तावेजों की जांच की और फर्जी पाए जाने के बाद इनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके अलावा, बद्री प्रसाद यादव, देवेन्द्र सिंह चौहान और रमाकांत शर्मा को भी विभाग में पदस्थ किया गया था। सीबीआई की जांच में यह सामने आया है कि अलग-अलग अभ्यर्थियों ने विभिन्न राज्यों के शैक्षणिक बोर्डों के नाम पर तैयार दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार कुछ दस्तावेज बिहार, झारखंड और जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों के बोर्डों से संबंधित बताए गए हैं। जांच दल के अनुसार, डाक विभाग में नियुक्त अभ्यर्थियों की 10वीं की अंकसूचियों का संबंधित शैक्षणिक बोर्डों से सत्यापन कराया गया था। इस सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद डाक विभाग ने इन आठ अभ्यर्थियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। सीबीआई टीम की जांच चल रही है, जिसमें ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है। इस मामले में विभिन्न डाकघरों में इनकी पोस्टिंग थी। सीबीआई ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने और भर्ती प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी की पूरी कड़ी की जांच शुरू कर दी है। जांच में कुछ कर्मचारियों के खिलाफ ठोस सबूत मिलने की संभावना है। डाक विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई को इसकी जांच सौंप दी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने और कर्मचारी फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से नौकरी प्राप्त करने में शामिल थे। इस पूरे मामले के बाद डाक विभाग में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना उन युवाओं के लिए भी चिंता का विषय है, जो ईमानदारी से नौकरी पाने के लिए प्रयासरत हैं।
