वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति शृंखला की बाधाओं के बीच, जहां दुनिया महंगाई और मुश्किलों से जूझ रही है, वहीं भारत एक सकारात्मक आर्थिक परिदृश्य पेश कर रहा है। इस उत्थान के पीछे भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए पुणे में कहा कि भारत गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि भारत का मजबूत डिजिटल ढांचा, देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई शक्ति देते हुए प्रगति का इंजन बन गया है। केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स की एक हालिया रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) तंत्र दुनिया के 10 सबसे असरदार संरचनात्मक सुधारों में से एक है। इस अभूतपूर्व डिजिटल ढांचे ने न केवल आम नागरिकों के लिए प्रशासनिक और बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाया है, बल्कि लेन-देन की लागत में भी ऐतिहासिक कटौती की है। इसने वित्तीय समावेशन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है और असंगठित अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण को तीव्र गति प्रदान की है। 'स्टेट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी 2026' रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था बन गया है। वर्तमान में भारत की जीडीपी में डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान लगभग 12 से 13 प्रतिशत है, जिसके अगले दशक में बढ़कर 20 प्रतिशत होने का अनुमान है। वहीं, भारत का डिजिटल रूप से प्रदत्त व्यापार (जैसे सॉफ्टवेयर, डेटा और क्लाउड सेवाएं) 328 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। पिछले एक दशक में भारत ने जिस गति, दूरदर्शिता और नवाचार से अपने डिजिटल तंत्र का विस्तार किया है, उसने देश के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। 'डिजिटल इंडिया' अभियान से शुरू हुई यह यात्रा आज दुनिया के सबसे बड़े और सफल 'डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना' के निर्माण तक पहुंच चुकी है। इस अभियान की रीढ़ 'इंडिया स्टैक' है, जो आधार (बायोमेट्रिक पहचान), यूपीआई और डिजीलॉकर (कागज रहित दस्तावेजीकरण) जैसे तीन प्रमुख स्तंभों पर टिका है। जन धन, आधार और मोबाइल की त्रिवेणी ने इस तकनीकी रीढ़ को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की है। भारत की डिजिटल प्रणाली की सफलता का मूल कारण विभिन्न सरकारी संस्थानों, नियामकों, बैंकों और तकनीकी संस्थाओं के बीच का बेहतर तालमेल और रणनीतिक सहयोग रहा है। डिजिटल बुनियादी ढांचे का सबसे व्यापक सकारात्मक प्रभाव एमएसएमई क्षेत्र और छोटे व्यापारियों पर देखा गया है। डिजिटल विकास ने भारत को विश्व का तीसरा सबसे बड़ा 'स्टार्टअप इकोसिस्टम' बना दिया है। फिनटेक, एड टेक, हेल्थ टेक और एग्री टेक जैसे क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स न केवल क्रांतिकारी सुविधाएं दे रहे हैं, बल्कि रोजगार सृजित कर रहे हैं और एफडीआई आकर्षित कर रहे हैं।
समाचार
मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की अर्थव्यवस्था का इंजन बना
8 नवंबर 2026 को 8:52 pm बजे
