मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों के विकास के लिए 30 से 50 साल की प्लानिंग की जाएगी
भोपाल के बाद अब मध्य प्रदेश के धार्मिक शहरों का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। सरकार ने बड़े शहरों के मास्टर प्लान को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना के अंतर्गत इंदौर, उज्जैन और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी शामिल किया जाएगा। नए मास्टर प्लान में आधुनिक सुविधाओं और प्रदूषण रहित वातावरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। शहरों को सेल्फ सस्टेनेबिलिटी की दिशा में बढ़ाने के लिए ऊर्जा और कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की जाएंगी। इस मास्टर प्लान में वर्टिकल डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए हाइट इमारतों के निर्माण का प्रावधान किया जाएगा। इससे कृषि भूमि की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इंदौर में भी मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में ग्रोथ कॉरीडोर विकसित करने की योजना है। इस योजना के तहत व्यवसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जाएगा। टीएंडसीपी की टीम ने इस योजना को अंतिम रूप देने से पहले गुजरात की गिफ्ट सिटी और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की प्लानिंग का अध्ययन किया था। भोपाल के मास्टर प्लान में फ्लैटेड इंडस्ट्री के प्रावधान किए गए हैं, जिससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। यहां बहुमंजिला इमारतों में भी उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। नए मास्टर प्लान में एफएआर बढ़ाने के साथ-साथ सड़कों की चौड़ाई को भी ध्यान में रखा जाएगा। कॉलोनियों की सड़कें कम से कम 9 मीटर चौड़ी होंगी। टीएंडसीपी के अनुसार, प्रदेश के उन शहरों में जहां आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहां ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित किया जाएगा। धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों के लिए भी अलग से मास्टर प्लान बनाए जाएंगे। इनमें ओंकारेश्वर, चित्रकूट, महेश्वर, मांडू और ओरछा जैसे स्थलों को शामिल किया जाएगा। इन धार्मिक स्थलों पर मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, आईटी पार्क और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भी बनाए जाएंगे। इस दृष्टिकोण से, अगले 30 से 50 सालों तक की प्लानिंग की जाएगी। मास्टर प्लान में आने वाले लोगों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इंदौर में मेट्रो के दोनों ओर ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे शहर में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। नए मास्टर प्लान में सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए भी प्रावधान शामिल किए गए हैं। यह व्यवस्था शहरों के भविष्य को देखते हुए बनाई गई है। धार्मिक स्थलों पर सैलानियों की संख्या बढ़ रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इस मास्टर प्लान में वॉक-टू-वर्क सुविधा का भी प्रावधान किया गया है, जिससे लोगों को उनके कार्यस्थल तक पहुंचने में आसानी होगी। इस योजना के अंतर्गत, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। नए शहरों में कॉलोनियों के विकास के लिए निजी कॉलोनाइजर को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि वे अस्पताल, स्कूल और वृद्धाश्रम जैसी सुविधाएं बनाएंगे, तो उन्हें ज्यादा एफएआर मिलेगा। इस प्रकार, शहरों के मास्टर प्लान में सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाएगा। आने वाले समय में, इन शहरों की पहचान और विकास के नए आयाम खुलेंगे। टीएंडसीपी द्वारा तैयार की गई यह योजना मध्य प्रदेश के धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के तहत, शहरों में प्रदूषण रहित वातावरण बनाने पर बल दिया जाएगा। कुल मिलाकर, यह मास्टर प्लान राज्य के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

