जन सुरक्षा संवाद: पुलिस-उच्च शिक्षा विभाग की पहल से 60 हजार से अधिक विद्यार्थी जुड़े
मध्य प्रदेश पुलिस और उच्च शिक्षा विभाग ने मिलकर युवाओं को संविधान, कानून, साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और नागरिक कर्तव्यों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक करने के लिए 'जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद' कार्यक्रम शुरू किया है। राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में आयोजित हो रही इन कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य युवाओं को न केवल कानूनी और सुरक्षा संबंधी जानकारी देना है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में विकसित होने के लिए प्रेरित करना भी है। अब तक 60 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं इन गतिविधियों से जुड़ चुके हैं, जो इस पहल की व्यापकता को दर्शाता है। सामुदायिक पुलिसिंग शाखा, मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा उच्च शिक्षा विभाग के साथ समन्वय से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम की रूपरेखा एक समझौता ज्ञापन (मोउ) के तहत तैयार की गई है। इसका लक्ष्य महाविद्यालयों और पुलिस के बीच एक संस्थागत संवाद स्थापित करना है, ताकि विद्यार्थियों को जन सुरक्षा से जुड़े विषयों की व्यावहारिक जानकारी मिल सके। कार्यक्रम के माध्यम से यह समझाया जा रहा है कि एक सुरक्षित समाज के निर्माण में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाओं के साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए, सामुदायिक पुलिसिंग शाखा, पुलिस मुख्यालय ने 10 अक्टूबर 2026 को राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (त्रैनिन्ग ओफ़ त्रैनेर्स्—तोत्) का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण में प्रदेश के 66 शासकीय महाविद्यालयों के 136 प्राध्यापकों ने भाग लिया। इन प्रशिक्षकों को संविधान एवं मौलिक अधिकार, विधिक जागरूकता, नवीन आपराधिक न्याय विधान, साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षित प्राध्यापकों के माध्यम से अब महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए निर्धारित विषयों पर संवाद और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। 14 एवं 15 अक्टूबर को उच्च शिक्षा विभाग के प्रशिक्षित प्राध्यापकों और मध्य प्रदेश पुलिस के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों के बीच एक ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान, कार्यक्रम के संचालन, विषयवस्तु और महाविद्यालय स्तर पर गतिविधियों के आयोजन को लेकर महत्वपूर्ण समन्वय स्थापित किया गया। विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय प्रारूप निर्धारित किया गया है। कार्यशालाओं में विद्यार्थियों को संविधान, मौलिक एवं कानूनी अधिकारों तथा नवीन आपराधिक न्याय विधान की मूलभूत जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही, साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। विद्यार्थियों को ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि के प्रति सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन भी आवश्यक है।
