मुफ्त रजिस्ट्री योजना में नया पेंच, पंचायतें बोलीं- एनओसी के बिना नहीं होगी रजिस्ट्री
मध्य प्रदेश में सरकारी जमीन पर काबिज ग्रामीणों को मालिकाना हक देने वाली मुफ्त रजिस्ट्री योजना में एक नया मोड़ आ गया है। अब रजिस्ट्री कराने से पहले ग्राम पंचायतों से 'नो ड्यूज' यानी बकाया राशि न होने का प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य करने की मांग उठाई गई है। मध्य प्रदेश राज्य पंचायत परिषद ने राजस्व विभाग को इस संबंध में पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया है। परिषद का तर्क है कि इससे पंचायतों की आय बढ़ेगी और संपत्ति कर तथा आवास ऋण की वसूली में भी तेजी आएगी। पंचायत राज संचालनालय ने बुधवार को इस प्रस्ताव पर आयुक्त भू-संसाधन एवं प्रबंधन को नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। हालांकि, इस एनओसी को अनिवार्य करने पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह सेंगर ने कहा कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि हितग्राही पर संपत्ति कर बकाया नहीं है और न ही आवास योजना का कोई ऋण लंबित है। साथ ही, यह भी पक्का होगा कि रजिस्ट्री की जा रही जमीन सार्वजनिक भूमि या अतिक्रमण के दायरे में नहीं आती है। परिषद का मानना है कि इस नई व्यवस्था से पंचायतों को आय के नए स्रोत मिलेंगे और बकाया कर की वसूली भी बढ़ेगी। इस मांग को मुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तक भी पहुंचाया गया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के तहत तेजी से मुफ्त रजिस्ट्री की जा रही है। गौरतलब है कि यह योजना 17 सितंबर से शुरू हुई थी। शुरुआत में पटवारियों के विरोध के चलते प्रक्रिया धीमी हो गई थी, लेकिन सरकार द्वारा स्पष्टीकरण के बाद पटवारियों के काम करने पर तेजी आई। अब तक 7.62 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां इस योजना के तहत 27 अक्टूबर तक पूरी हो चुकी थीं।
