भोपाल में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पुस्तक लेखन कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। उच्च शिक्षा विभाग और मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में पुस्तक लेखन, प्रामाणिक संदर्भ सामग्री के उपयोग और विद्यार्थी-केंद्रित गतिविधियों पर गहन मंथन हुआ। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण एवं मौलिक लेखन को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रामाणिक तथ्यों के साथ पाठ्यपुस्तकों में समाहित करना रहा। समापन सत्र को संबोधित करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि इस कार्यशाला का सफल आयोजन पुस्तक लेखन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने जोर दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में न केवल सफल जीवन, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने के सूत्र भी निहित हैं। इन सूत्रों को समझना जीवन को एक नई दिशा दे सकता है, क्योंकि केवल सफल होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन का सार्थक होना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित नई शिक्षा नीति जीवन को सार्थक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डॉ. कोठारी ने निरंतर अकादमिक रुचि विकसित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा पर आधारित विषयों के व्याख्यानों को सुनना और उनके विचारों को समझना आवश्यक है, क्योंकि इनमें जीवन को सार्थक बनाने का संदेश समाहित है। यह केवल अकादमिक विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक दर्शन है जिसे हमें समझना और अपनाना चाहिए। इस अवसर पर मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कड़ेल ने बताया कि अकादमी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा के बौद्धिक व व्यावहारिक ज्ञान को समाहित करते हुए 17 लाख से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर उन्हें विद्यार्थियों तक पहुंचाने का कार्य किया गया है। उन्होंने यह भी सूचित किया कि आगामी शैक्षणिक सत्रों में भारतीय ज्ञान परंपरा की समग्रता पर आधारित पाठ्यपुस्तकें तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन नई पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा, बल्कि स्वावलंबन की भावना को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि शिक्षा ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उनके व्यावहारिक जीवन और आजीविका के लिए भी उपयोगी बने। यह शिक्षा के व्यवसायीकरण से हटकर उसे जीवन के समग्र विकास से जोड़ने की एक पहल है।
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पुस्तक लेखन से शिक्षा और जीवन को मिलेगी सार्थक दिशा
25 अक्टूबर 2026 को 11:53 pm बजे
पुस्तक लेखन से शिक्षा और जीवन को मिलेगी सार्थक दिशा
