जबलपुर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया है। 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई के लिए सरकार ने पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तुत किए हैं। इन विशेषज्ञों में यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले लोग शामिल हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष पीजी नाजपाण्डे और समाजसेवी रजत भार्गव ने यातायात व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था और अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि शहर की यातायात व्यवस्था की खामियों को दूर किया जाए। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। अदालत ने यातायात सुधार के लिए इंजीनियरिंग, शिक्षा और प्रवर्तन के तीन पहलुओं पर काम करने की आवश्यकता बताई है। यह उपाय ट्रैफिक सिग्नलों की स्थिति, सड़क प्रबंधन और नियमों के पालन में सुधार के लिए जरूरी हैं। सरकार ने जिन पांच विशेषज्ञों के नाम पेश किए हैं, उनमें राजीव चांडक, अशोक शुक्ला, इशिता शेखावत, अनुज जायसवाल और अंकुर खरे शामिल हैं। इन सभी विशेषज्ञों के अनुभव का उपयोग कर हाईकोर्ट समिति की संरचना तय करेगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली उपस्थित हुए। इस सुनवाई में विशेष समिति के गठन को लेकर चर्चा की गई। विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य जबलपुर की यातायात व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी, प्रशासनिक और व्यवहारगत समस्याओं का अध्ययन करना है। इसके माध्यम से शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए प्रभावी उपाय सुझाए जाएंगे।
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हाईकोर्ट ने ट्रैफिक सुधार के लिए समिति बनाई
29 सितंबर 2026 को 10:59 pm बजे

हाईकोर्ट ने ट्रैफिक सुधार के लिए समिति बनाई
