सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का अवसर होगा यह समारोह
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कालिदास समारोह एक प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आगामी 21 से 27 नवंबर तक होने वाले इस समारोह में प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठ गीतकारों और साहित्यकारों की स्मृतियों को सम्मानित किया जाएगा। मंत्रालय में हुई केंद्रीय समिति की बैठक में मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इस समारोह के अंतर्गत कवि प्रदीप, कृष्ण सरल, शिवमंगल सिंह सुमन और शरद जोशी की याद में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे राज्य की कला और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि समारोह में पूर्व रंग के अंतर्गत 25 नवंबर को मंगल कलश यात्रा और नांदी सांस्कृतिक प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। इस आयोजन से प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि समारोह में राज्य की प्रतिभाओं को अवसर मिलें और वे विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन कला स्पर्धाओं से भी जुड़ें। इससे युवा कलाकारों को अपने हुनर को प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। नाट्य विधा से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों और निर्देशकों को कला प्रदर्शन के अधिकाधिक अवसर मिलेंगे। समारोह में शामिल होने वाले कलाकारों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी ताकि वे अपने कला कौशल का प्रदर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि समारोह के शुभारंभ के दिवस पर 21 नवंबर को अतिथियों द्वारा राष्ट्रीय चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का शुभारंभ किया जाएगा। यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए एक विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। समारोह के दौरान क्षेत्रीय बोलियों और भाषाओं के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री यादव ने 68वें कालिदास समारोह के लिए बनाई गई कार्यक्रमों की रूपरेखा की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने सभी कार्यक्रमों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। समारोह में 24 नवंबर को राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी, पंडित सूर्यनारायण व्यास स्मृति व्याख्यान और 26 नवंबर को महाकवि कालिदास स्मृति व्याख्यान होगा। इसके साथ 25 नवंबर को पद्मश्री वाकणकर स्मृति व्याख्यान और संस्कृत नाटकों का मंचन किया जाएगा।

