आधुनिक कृषि तकनीकों और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से किसान खेती को लाभ का बेहतर माध्यम बना सकते हैं। इसी का उदाहरण उज्जैन जिले के ग्राम अमलाखेड़ी, तहसील तराना के किसान विशाल पाटीदार हैं। पाटीदार उद्यानिकी विभाग से जुड़कर विभाग द्वारा सुझाई गई मिर्ची की किस्म की खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही वे गेंदे के फूलों की खेती से अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर रहे हैं। किसान पाटीदार ने एक बीघा खेत में मिर्ची की फसल के लिए जून माह में पौध तैयार की और जुलाई माह में खेत में रोपाई की। फसल में पानी के बेहतर प्रबंधन और नमी बनाए रखने के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई पद्धति एवं मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इन आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर वे फसल प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बना रहे हैं। मिर्ची की फसल के बीच किसान पाटीदार ने गेंदे के फूलों के पौधे भी लगाए हैं। इस प्रयोग से उन्हें मिर्ची की फसल के साथ-साथ गेंदे के फूलों की उपज भी मिल रही है। गेंदे की अंतरवर्तीय खेती ने अतिरिक्त आय का एक नया माध्यम तैयार किया है। इसके अतिरिक्त, गेंदे के पौधे कुछ कीटों के प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं। साथ ही, ये खेत में निमेटोड के प्रभाव को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकते हैं। इस प्रकार किसान एक ही खेत में अलग-अलग फसलों के माध्यम से खेती की उपयोगिता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में किसान विशाल पाटीदार ने मिर्ची की खेती में आधुनिक तकनीकों और अंतरवर्तीय फसल पद्धति को अपनाया है। उनका यह प्रयास अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है। यह दर्शाता है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। पाटीदार ने अन्य किसान भाइयों से अपील की है कि वे उद्यानिकी विभाग से जुड़ें, विभागीय मार्गदर्शन प्राप्त करें। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने का प्रयास करें। किसान पाटीदार का यह नवाचार खेती को लाभदायक बनाने का एक सफल उदाहरण है।
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उद्यानिकी विभाग की मदद से किसान ने मिर्ची और गेंदा उगाकर की कमाई
29 अक्टूबर 2026 को 10:40 pm बजे
