जम्मू और कश्मीर में राज्यहूद की बहाली को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव विधानसभा द्वारा 28 सितंबर को पारित किया गया। इस प्रस्ताव में भारत सरकार से तत्काल और आवश्यक रूप से पूर्ण राज्यहूद की बहाली की मांग की गई है। यह मांग उस समय उठाई गई है जब जम्मू और कश्मीर लगभग सात साल से एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में है। संविधान के तहत जम्मू और कश्मीर को विशेष स्थिति दिए जाने के लगभग 2000 वर्षों बाद, केंद्र ने इस क्षेत्र को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। यह निर्णय न केवल ऐतिहासिक था, बल्कि इसके पीछे के कारणों ने लोकतंत्र और संघवाद को भी प्रभावित किया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जल्द से जल्द राज्यहूद की बहाली की मांग की है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'उचित समय' पर करने का आश्वासन दिया है। इस प्रक्रिया में पहला कदम राज्यहूद की बहाली होना चाहिए। हाल के चुनावों में जम्मू और कश्मीर ने शांतिपूर्ण मतदान का उदाहरण पेश किया था, जिसमें 63.88 प्रतिशत मतदान दर रही। चुनाव में किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं हुई, जो पिछले तीन दशकों में पहली बार हुआ। यह चुनाव लोगों के लोकतांत्रिक विश्वास को दर्शाता है, और केंद्र को इस पर विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में इस प्रस्ताव को पेश करते हुए पिछले प्रस्तावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विशेष स्थिति की मांग के लिए कई बार विधानसभा में प्रस्ताव पारित किए गए हैं, और अब समय है कि इन पर ध्यान दिया जाए। राज्यहूद की बहाली की दिशा में यह कदम न केवल जम्मू और कश्मीर के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए भी है जो लोकतंत्र और संघवाद को महत्व देते हैं।
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राज्यहूद की बहाली की दिशा में नया कदम
30 सितंबर 2026 को 11:39 pm बजे
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