10 किलोमीटर तक तस्करों का पीछा
खंडवा जिले के पुनासा-सनावद मार्ग पर सागौन तस्करों ने वन अमले से बचने के लिए पिकअप से कूदकर जंगल में भागने की कोशिश की। वन विभाग के अधिकारियों ने आरोपियों का पीछा किया और करीब 10-12 किलोमीटर तक उनका पीछा करते रहे। वन अमले ने फिफरी के जंगल में सागौन की अवैध कटाई की सूचना पर कार्रवाई की। जब वनकर्मी मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि आरोपियों का वाहन तेज गति से सनावद की ओर जा रहा था। वन विभाग ने आरोपियों के वाहन का पीछा किया, लेकिन आरोपियों ने वाहन की गति बढ़ा दी। जब वनकर्मियों ने पिकअप को रोकने का प्रयास किया, तो चालक ने गाड़ी की रफ्तार और तेज कर दी। करीब 10 से 12 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद आरोपियों ने मोहना और टेमचा के बीच चलती पिकअप से कूदकर जंगल में भागने की कोशिश की। इस दौरान पिकअप का नियंत्रण ड्राइवर के हाथ से छूट गया और वाहन पलट गया। वन विभाग ने पिकअप और उसमें रखे सागौन के सभी 18 लट्ठों को जब्त कर लिया। जब्त की गई लकड़ी की मात्रा 2.424 घनमीटर है, जिसकी कीमत एक लाख रुपए से अधिक आंकी गई है। वन विभाग ने अब यह भी जांच शुरू कर दी है कि पिकअप पर बाइक का नंबर क्यों लगाया गया था। मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में घेराबंदी की। रेंजर रवि सेठ ने बताया कि 29 सितंबर को उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि दक्षिण फिफरी बीट के जंगल में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है। जब वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर वाहन की तलाशी ली, तो उन्हें सागौन प्रजाति के 18 लट्ठे मिले। यह कार्रवाई वन विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई। अज्ञात आरोपियों की पहचान और उनकी तलाश जारी है। वन विभाग ने मामले में प्रकरण दर्ज किया है और आरोपियों की तलाश के लिए जांच की जा रही है। वन विभाग ने जांच में यह भी पाया कि पिकअप पर लगा नंबर पिकअप का नहीं, बल्कि बाइक का था। इस बात ने वन अमले को चौंका दिया। वनकर्मियों ने मोटरसाइकिल और शासकीय वाहन से पिकअप का पीछा किया, लेकिन आरोपियों ने इस दौरान कूदने का फैसला किया। वन अमले के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्हें आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए सभी संभव प्रयास करने होंगे। जब्त पिकअप वाहन पर अंकित नंबर एमपी-47 जेडए-2178 था। इस मामले में अब विभाग वाहन के असली मालिक की भी जानकारी जुटा रहा है। वन विभाग ने इस मामले में आरोपियों की खोजबीन तेज कर दी है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। इस घटना ने अवैध तस्करी के मामलों की गंभीरता को उजागर किया है। वन विभाग को इस तरह के मामलों को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

