उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में प्रतिमा की देर रात हुई स्कैनिंग, आधार की गहराई नापी गई
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में स्थापित प्राचीन प्रतिमा को हटाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद, प्रशासनिक टीम मंगलवार की देर शाम विशेष मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ मंदिर पहुंची। यहां प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की स्कैनिंग की गई, जिससे यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रतिमा का आधार जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे की संरचना कैसी है। हालांकि, जांच के बाद प्रतिमा को हटाने की आगे कोई कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। भोपाल से पहुंची विशेषज्ञों की टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक मंदिर में रहकर प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की अलग-अलग तरीकों से स्कैनिंग की। इस बीच, भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने देर रात जांच कराने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन प्रतिमा की संरचना की जांच करना चाहता है, तो उसे पारदर्शी तरीके से सबके सामने जांच करनी चाहिए। रात के अंधेरे में बिना सार्वजनिक जानकारी दिए टीम के पहुंचने से श्रद्धालुओं के बीच भ्रम और आशंका पैदा हो रही है। उन्होंने प्रशासन से प्रतिमा को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट करने की मांग की। तिवारी ने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान कुछ स्थानों पर उपकरण लगाने के बाद उनकी बैटरी अचानक डिस्चार्ज हो गई, जिससे अधिकारियों को उपकरण दोबारा चार्ज करने पड़े। उन्होंने इस घटना को भगवान का संकेत बताया। बता दें कि खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई 30 अगस्त 2026 को शुरू करने का प्रयास हुआ था, लेकिन श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों के विरोध के कारण इसे रोकना पड़ा था। 1 सितंबर को टीम दोबारा पहुंची और करीब 16 घंटे की कार्रवाई में मंदिर का शिखर व ऊपरी हिस्सा हटाया गया। इसके बाद 4 सितंबर को मुख्य ढांचा भी हटा दिया गया। प्रशासन की योजना करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा को टंकी चौक के पास बने नए मंदिर में स्थापित करने की थी। 5 से 7 सितंबर के बीच प्रतिमा के पास डेढ़ फीट खुदाई के बाद भी उसका आधार नहीं मिला और प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। इसके बाद 8 सितंबर को वैज्ञानिक जांच का निर्णय लिया गया। 9 सितंबर को आईआईटी इंदौर की टीम ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक से प्रतिमा के नीचे की संरचना की स्कैनिंग की। मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा की सुरक्षा के लिए उसके ऊपर कैनोपी यानी टेंट लगाया गया है। प्रशासन प्रतिमा को नए मंदिर में स्थापित करना चाहता था।
