कार्यशाला में ऑनलाइन प्रतिभागियों के लिए प्रमाण-पत्र वितरित किए गए
दमोह में श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों के अधिकारों पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का नाम ‘अनुगूंज से उद्घोष’ रखा गया। यह कार्यशाला सांकेतिक भाषा सप्ताह के अवसर पर आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सभी जिलों से प्रतिभागियों ने ऑनलाइन भाग लिया। दमोह के एडीआर भवन में प्रधान जिला न्यायाधीश सुभाष सोलंकी, वरिष्ठ खण्ड न्यायाधीश उषाकांता कृषाण, और जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। कार्यशाला का उद्देश्य श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान करना था। विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को शिक्षा, कैरियर, भावनात्मक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और सामाजिक चुनौतियों से संबंधित जानकारी दी गई। साथ ही, दिंव्यांगजन अधिनियम 2016 के अंतर्गत न्याय तक पहुँच के विषय में भी जानकारी दी गई। कार्यशाला में लैंगिक हिंसा और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे विषयों पर संकेतिक भाषा में लघुनाटिका प्रस्तुत की गई। कार्यशाला में साइबर सुरक्षा सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें सोशल मीडिया के उपयोग और ऑनलाइन जोखिम से बचाव के उपाय सुझाए गए। प्रतिभागियों को जानकारी दी गई कि कैसे वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी श्रवण एवं वाक् बाधित प्रतिभागियों को प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। यह प्रमाण-पत्र प्रधान जिला न्यायाधीश सुभाष सोलंकी द्वारा वितरित किए गए। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश वाय कोवजे और कार्यपालक अध्यक्ष विवेक रूसिया ने दिव्यांग और श्रवण बाधित व्यक्तियों के अधिकारों, आत्मनिर्भरता, समान अवसर और समाज में उनकी प्रभावी भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि समाज में इन व्यक्तियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। कार्यशाला का आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समाज में श्रवण और वाक् बाधित व्यक्तियों के अधिकारों को मान्यता देने की दिशा में उठाया गया है। इस तरह के कार्यक्रमों से न केवल जागरूकता बढ़ती है, बल्कि इन व्यक्तियों को अपने अधिकारों के प्रति भी सजग किया जाता है। समाज में इस तरह के कार्यक्रमों की आवश्यकता है ताकि सभी व्यक्तियों को समान अवसर मिल सकें और वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें। यह कार्यशाला इस दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इस कार्यशाला से यह भी स्पष्ट होता है कि श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यह कार्यक्रम इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाता है। कार्यशाला के माध्यम से श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के साथ-साथ समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया। इस तरह के कार्यक्रमों की निरंतरता से समाज में समावेशिता और समानता की भावना को बढ़ावा मिलेगा। न्यायपालिका द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन समाज की मुख्यधारा में श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इस कार्यशाला ने सभी प्रतिभागियों को एक मंच प्रदान किया, जहाँ उन्होंने अपने विचार साझा किए और एक-दूसरे से सीखा। आने वाले समय में इस तरह की और भी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों के अधिकारों को और मजबूती मिलेगी। कार्यशाला का आयोजन मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया था, जो इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज मिलकर काम करता है, तो सकारात्मक बदलाव संभव है।

