पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मनु मिश्रा ने कहा कि स्वच्छता केवल नगर पालिका या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी नागरिकों का सामूहिक दायित्व है, मंदिर और धार्मिक स्थल हमारी आस्था के केंद्र हैं
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर में उत्पन्न हुई गंदगी की समस्या गंभीर हो गई थी
शहर में स्वच्छता का संदेश देते हुए नगर पालिका दमोह के पूर्व अध्यक्ष मनु मिश्रा ने घंटाघर स्थित प्राचीन बूंदाबहू मंदिर में सफाई अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने स्वयं मंदिर परिसर एवं मंदिर के बाहर सड़क पर झाड़ू लगाकर साफ-सफाई की और स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया। उल्लेखनीय है कि विगत दिनों सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसके कारण नगर के विभिन्न स्थानों पर कचरे के ढेर लग गए थे, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। धार्मिक स्थलों के आसपास भी गंदगी फैल गई थी, जो श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी समस्या बन गई थी। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मनु मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि स्वच्छता केवल नगर पालिका या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी नागरिकों का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति को अपने आसपास सफाई रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मनु मिश्रा ने आगे कहा कि मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल हमारी आस्था के केंद्र होते हैं। इनकी पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि शहर हमारा है, इसलिए इसे स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से आह्वान किया कि वे अपने आसपास साफ-सफाई के लिए आगे आएं और शहर को साफ-सुथरा बनाए रखने में अपना योगदान दें। उनका यह व्यक्तिगत प्रयास नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और उन्हें प्रेरित करने का एक अनूठा तरीका था। मनु मिश्रा ने स्वयं झाड़ू लगाकर नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने और अपने शहर को साफ-सुथरा बनाए रखने का संदेश दिया। उनका यह प्रयास सामाजिक सहभागिता और नागरिक जिम्मेदारी की एक प्रेरक मिसाल बना, जिसने कई अन्य लोगों को भी प्रेरित किया। इस सफाई अभियान में पंडित मनोज देवलिया और मित्र मंडल सदस्यों ने भी सहभागिता निभाई। उन्होंने मनु मिश्रा के इस प्रयास का समर्थन किया और मिलकर मंदिर परिसर की सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर में उत्पन्न हुई गंदगी की समस्या गंभीर हो गई थी। कई जगहों पर कूड़े के ढेर जमा हो गए थे, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही थी, बल्कि बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया था। खासकर धार्मिक स्थलों के आसपास की गंदगी ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से परेशान किया था। ऐसी स्थिति में, मनु मिश्रा का यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने न केवल स्वयं सफाई की, बल्कि एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास भी कराया। उन्होंने यह संदेश दिया कि नागरिक अपने शहर को बेहतर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वच्छता एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इसके लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास आवश्यक हैं। केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर रहने के बजाय, नागरिकों को भी अपनी भूमिका समझनी होगी और सक्रिय होना होगा। मनु मिश्रा के इस अभियान ने यह साबित किया कि जब लोग सामूहिक रूप से किसी अच्छे कार्य के लिए आगे आते हैं, तो सकारात्मक बदलाव लाना संभव है। उनके इस कार्य की स्थानीय समुदाय में काफी सराहना हुई। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने घरों, अपने मोहल्लों और अपने शहरों को साफ रखने का संकल्प लेना चाहिए। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि हमारे शहर की छवि को भी बेहतर बनाता है। धार्मिक स्थलों का महत्व बताते हुए मनु मिश्रा ने कहा कि ये स्थान न केवल पूजा-पाठ के लिए होते हैं, बल्कि ये हमारी संस्कृति और परंपराओं के प्रतीक भी हैं। इनकी स्वच्छता बनाए रखना हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना भी है। इस अभियान में शामिल पंडित मनोज देवलिया और मंडल सदस्यों ने भी स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला और भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेने की प्रतिबद्धता जताई। कुल मिलाकर, मनु मिश्रा का यह स्वच्छता अभियान एक सफल पहल साबित हुआ, जिसने न केवल घंटाघर स्थित प्राचीन बूंदाबहू मंदिर परिसर को स्वच्छ बनाया, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता के प्रति उनकी सामूहिक जिम्मेदारी का भी अहसास कराया।

