उत्तर प्रदेश के पावर कॉरिडोर में रोज नई चर्चाएं होती हैं, और इन दिनों कुछ ऐसी ही बातें सुर्खियां बटोर रही हैं। प्रदेश के एक पावर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को उम्मीद थी कि उनके खास व्यक्ति के मुख्य कुर्सी पर बैठते ही उनकी ताकत बढ़ जाएगी और वे शीर्ष नेतृत्व के चहेते बन जाएंगे। उन्होंने इस उम्मीद में कुछ बयान भी दिए, लेकिन सत्ता संभालते ही मुखिया ने पासा पलट दिया। कल तक जो खास था, वह अब दूर हो गया है, जिससे यह अधिकारी परेशान हैं और कह रहे हैं कि उनका 'करंट' ही बंद हो गया है। वे अब न घर के रहे, न घाट के। वहीं, प्रदेश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में भी मुखिया के भरोसे की खूब चर्चा है। विश्वविद्यालय में कई अहम पद खाली पड़े हैं, लेकिन नए लोगों पर भरोसा न होने के कारण तैनाती नहीं हो पा रही है। मुखिया पुराने लोगों को ही अतिरिक्त प्रभार देकर काम चला रहे हैं, हालांकि बदलते दौर में ये लोग तकनीक के साथ कदमताल नहीं कर पा रहे हैं। इससे विश्वविद्यालय के विकास पर असर पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय खेल मंत्रालय की प्रदेश शाखा में तैनात एक अधिकारी की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। उनका काम विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना है, लेकिन वे अधिकतर मामलों में सफल नहीं हो पाते। बड़े आयोजनों में उनका आत्मविश्वास भी डगमगा जाता है। खेलों से कम जुड़ाव के कारण उनकी जानकारी केवल कागजों तक सीमित है, जिस कारण वे अपने काम को ठीक से नहीं कर पाते। यह अधिकारी आमतौर पर अपने दायरे में ही रहना पसंद करते हैं, जब तक कि उन्हें किसी काम की जरूरत न पड़े। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ये साहब अपने काम में थोड़े कच्चे साबित हो रहे हैं। उनकी कार्यशैली को लेकर विभाग में भी फुसफुसाहटें तेज हैं। उनकी इस धीमी और अप्रभावी कार्यप्रणाली का असर विभाग के प्रचार-प्रसार अभियानों पर साफ देखा जा सकता है। योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने में वे नाकाम साबित हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब विभाग का मुख्य उद्देश्य योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। अधिकारी की जानकारी और अनुभव की कमी इस काम में बाधा बन रही है। यदि आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो आप 8859108085 पर व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
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अफसर का फ्यूज उड़ा, मुखिया का भरोसा
25 अक्टूबर 2026 को 11:53 pm बजे
