नाबालिग की शिक्षा और भविष्य को ध्यान में रखा
कोर्ट ने कहा, नानी सुनिश्चित करे कि बालिका स्कूल जाए और कचरा न उठाए
यदि नानी इन शर्तों का उल्लंघन करती है, जैसे कि बालिका से कचरा उठवाती है या उसे स्कूल नहीं भेजती है, तो मां को सबूतों के साथ अदालत में याचिका दायर करने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि मां और नानी के घर आमने-सामने स्थित हैं। इस भौगोलिक निकटता को देखते हुए, अदालत ने बालिका को अपनी मां के घर जाने और उनसे मिलने की छूट भी प्रदान की है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि बालिका दोनों परिवारों के स्नेह और देखभाल से वंचित न रहे, जबकि वह अपनी नानी की देखरेख में शिक्षा प्राप्त करे। इस तरह, कोर्ट ने परिवार के सदस्यों के बीच संबंध बनाए रखने का भी प्रयास किया है। यह पूरा मामला इंदौर शहर से जुड़ा है, जहां मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। यह मामला बच्चों के अधिकारों और उनकी शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। नानी द्वारा बालिका की शिक्षा का खर्च उठाने और उससे कचरा न उठवाने की शर्त यह दर्शाती है कि कानून बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कड़े कदम उठाने को तैयार है।
