मध्य प्रदेश में दिवाली के बाद ठंड का असर बढ़ने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4 दिनों में न्यूनतम तापमान 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा। ऐसे में कई शहरों में यह 10-11 डिग्री तक पहुंच सकता है। बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। शहडोल के कल्याणपुर और दमोह में 12.2 डिग्री, शाजापुर से जुड़े गिरवर में 12.6 डिग्री, उमरिया में 12.7 डिग्री, भोपाल-पचमढ़ी में 12.8 डिग्री सेल्सियस तक पारा पहुंच गया। वहीं, अधिकतम तापमान की बात करें तो अमरकंटक, पचमढ़ी, मलाजखंड, बैतूल, शिवपुरी और करौंदी में 30 डिग्री या इससे कम रिकॉर्ड हुआ। दूसरी ओर, छिंदवाड़ा में पारा सबसे ज्यादा 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि शनिवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी- बारिश का अलर्ट नहीं है। इस दिन रूपचौदस है। दिवाली वाले दिन 8 नवंबर को भी बारिश की कोई संभावना नहीं है। आंधी-बारिश न होने से त्योहार की खुशियों में खलल नहीं पड़ेगा। 15 नवंबर के बाद ठंड का असर और बढ़ेगा। पिछले 10 साल के ट्रेंड को देखें तो नवंबर के दूसरे पखवाड़े से ठंड का असर बढ़ने लगता है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार, नवंबर के दूसरे सप्ताह से ठंड का प्रभाव और बढ़ेगा। विशेषकर ग्वालियर- चंबल संभाग के जिलों में, जहां उत्तरी हवाएं सीधी प्रवेश करती हैं, वहां न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। ग्वालियर में 57 साल पहले नवंबर के महीने में रात का तापमान रिकॉर्ड 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है। उज्जैन में 53 साल पहले न्यूनतम पारा रिकॉर्ड 2.3 डिग्री तक जा चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर जैसे शहरों में इस महीने बारिश होने का एक सामान्य ट्रेंड रहा है। इस वर्ष नवंबर की शुरुआत में ही बारिश का अलर्ट जारी किया गया था। नवंबर के तीसरे और चौथे सप्ताह में सिस्टम के सक्रिय होने से भी बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब जानते हैं कि नवंबर में 5 बड़े शहरों का मौसम कैसा रहने वाला है। भोपाल में पिछले 10 साल में 3 बार बारिश हो चुकी है। नवंबर में राजधानी का रात का तापमान सामान्यतः 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले 10 सालों से यही ट्रेंड जारी है। इस बार भी नवंबर के दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से लुढ़कने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में नवंबर माह में रात का तापमान 6.1 डिग्री तक दर्ज किया गया है। यह 30 नवंबर 1941 को दर्ज किया गया था। इस महीने बारिश होने का भी एक सामान्य ट्रेंड है। पिछले 10 सालों में तीन बार ऐसी स्थिति बनी है जब नवंबर में बारिश हुई हो। साल 1936 में इस महीने में 5 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इंदौर में ठंड का असर देखने को मिलता है, खासकर नवंबर के दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से गिरता है। इस कारण रातें ठंडी हो जाती हैं और तापमान 10 से 12 डिग्री के बीच रहता है। हालांकि, 25 नवंबर 1938 को यहां पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था। कभी-कभी यहां बारिश भी हो जाती है। दिन के समय तापमान 31 से 33 डिग्री के बीच रहता है। ग्वालियर में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पारा 8 डिग्री तक पहुंच चुका है। 54 साल पहले वर्ष 1970 में तापमान 3 डिग्री तक पहुंच गया था, जो कि एक ओवरऑल रिकॉर्ड है। 2 नवंबर 2001 को दिन का तापमान 37.3 डिग्री तक पहुंच गया था, जबकि यह सामान्य तौर पर 33 से 35 डिग्री के बीच रहता है। इस महीने यहां बारिश भी होती है। 1927 में पूरे महीने 5 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। पिछले 10 साल में 3 बार ऐसी स्थिति बनी है जब ऐसा मौसम रहा हो। जबलपुर में 2022 में न्यूनतम पारा 7.8 डिग्री तक जा चुका है। ओवरऑल रिकॉर्ड 12 नवंबर 1989 को दर्ज किया गया था, तब तापमान 3.9 डिग्री तक पहुंच गया था। साल 1946 में पूरे महीने 6 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। पिछले 10 साल में दो बार बारिश हो चुकी है। दिन में तापमान 30 से 33 डिग्री के बीच रहता है। उज्जैन में 30 नवंबर 1974 को रात का तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो एक ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 6 नवंबर 2008 को दिन का तापमान 36.5 डिग्री रहा था।
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ठंड का प्रकोप बढ़ेगा: दिवाली के बाद मध्य प्रदेश में पारा गिरेगा
8 नवंबर 2026 को 8:52 pm बजे

ठंड का प्रकोप बढ़ेगा: दिवाली के बाद मध्य प्रदेश में पारा गिरेगा
