कम बारिश और सूखे जैसे हालात के बीच उज्जैन के सामने सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए जल प्रबंधन की बड़ी चुनौती है। गंभीर बांध में क्षमता का केवल 26 प्रतिशत जल भंडार बचा है, जो 594 एमसीएफटी पानी के बराबर है। यह स्थिति नर्मदा से पानी की आपूर्ति और जल संग्रहण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। शहर की पेयजल व्यवस्था को संभालने के लिए नर्मदा का पानी गंभीर बांध और गऊघाट जल शोधन व्यवस्था तक पहुंचाया जा रहा है। नर्मदा से मिल रही राहत के बावजूद, उपलब्ध पानी और शहर की रोजाना खपत के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। कम बारिश का असर भूजल पर भी पड़ सकता है, जिससे निजी बोरिंग और कुओं पर निर्भर इलाकों में गर्मी के दौरान जलस्तर गिरने से परेशानी बढ़ सकती है। 1133 करोड़ की हरियाखेड़ी जल आवर्धन योजना का उद्देश्य शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करना और सिंहस्थ के दौरान स्थानीय आबादी की जरूरतों को पूरा करना है। इस योजना में 708 किलोमीटर पाइपलाइन, करीब 534 किलोमीटर नया वितरण नेटवर्क और 600 से 3000 किलोलीटर क्षमता की 17 नई पानी की टंकियां शामिल हैं। इसे 24 माह में चरणबद्ध पूरा करने का लक्ष्य है, जिससे वर्ष 2055 तक जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सके। घरों तक पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था और शिप्रा में स्नान के लिए पर्याप्त प्रवाह बनाए रखना दो अलग चुनौतियां हैं। नदी के लिए जल संग्रहण और प्रदूषण रोकने के इंतजाम भी उतने ही जरूरी हैं। करीब 614 करोड़ रुपये की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना में लगभग 51 मिलियन घन मीटर यानी करीब 1800 एमसीएफटी पानी संग्रहित करने की क्षमता विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य बरसात का पानी सहेजना और जरूरत पडऩे पर उसे शिप्रा में छोड़ना है। अक्टूबर में सामने आई प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का करीब 84 प्रतिशत काम पूरा हुआ था, जिसे मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य था। हालांकि, जलाशय की निर्धारित क्षमता और उसमें वास्तव में जमा होने वाले पानी में अंतर है। अगले मानसून में पानी की कितनी मात्रा संग्रहित होगी, यह बारिश और जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले प्रवाह पर निर्भर करेगा। बड़ी परीक्षा के तौर पर, करीब 920 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना का उद्देश्य कान्ह नदी के दूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकना है। लगभग 30.15 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में भूमिगत सुरंग और क्लोज डक्ट का निर्माण शामिल है। सिंहस्थ से पहले इसका पूरा होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि नदी में पानी की गुणवत्ता बनाए रखना भी जरूरी है। सिंहस्थ-2028 के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये के 175 निर्माण कार्यों को अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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गंभीर बांध में पानी की कमी, शिप्रा पर सिंहस्थ की चुनौती
29 अक्टूबर 2026 को 10:40 pm बजे
