राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान, भोपाल और कृषि विज्ञान केंद्र, शहडोल के संयुक्त तत्वावधान में 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक 'पशुधन और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आदिवासी महिलाओं का सशक्तिकरण' विषय पर तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं आदान सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 100 आदिवासी महिलाओं को मुर्गीपालन, पशुधन प्रबंधन, आजीविका संवर्धन और पोषण सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मृगेंद्र सिंह ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और ग्रामीण विकास के लिए खेती के साथ पशुपालन, कुक्कुट पालन जैसे व्यवसाय अपनाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कुक्कुट पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण जरिया है। संस्थान के डॉ. अतुल पटेरिया और डॉ. शालिनी चक्रवर्ती ने बताया कि यह प्रशिक्षण आदिवासी महिला किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने, मांस-अंडों के बेहतर उपयोग और पशुधन-मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गीपालन से आय बढ़ने के साथ पोषण और खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि घरेलू मुर्गीपालन में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह व्यवसाय कम लागत, कम जगह और सीमित संसाधनों में शुरू किया जा सकता है। महिलाएं घर के बचे हुए खाद्य पदार्थों का उपयोग मुर्गियों के आहार में कर खर्च कम कर सकती हैं, जिससे परिवार में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ती है और कुपोषण दूर होता है।
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आदिवासी महिलाओं को मुर्गीपालन का प्रशिक्षण, आय बढ़ाने पर जोर
29 अक्टूबर 2026 को 10:40 pm बजे
