शहरों के समावेशी विकास को नई गति देगी मोहन नीति
मध्यप्रदेश की डा. मोहन यादव सरकार प्रदेश में शहरी विकास को नई गति देने, आवास की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और शहरों में निवेश के नए अवसर तैयार करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। मध्यप्रदेश शहरी किफायती आवास एवं पर्यावास नीति, 2026 इस दिशा में एक महत्वपूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत करेगी। इसमें सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग, निजी निवेश, सस्ते मकानों, किराये के आवास, झुग्गी पुनर्विकास, ऑनलाइन अनुमतियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों को बढ़ावा दिया जायेगा। इससे प्रदेश के शहरों के विकास को आम नागरिक की जरूरत, युवा पीढ़ी के भविष्य और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ जोड़ने का अवसर मिलेगा। मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ती शहरी आबादी के लिए मकान उपलब्ध कराना आने वाले वर्षों की बड़ी जरूरत है। विभागीय नीति में दिए गए अनुमान के अनुसार, वर्ष 2036 तक प्रदेश में कुल 20 लाख 82 हजार 199 आवास इकाइयों की आवश्यकता होगी। इनमें 17 लाख 17 हजार 393 इकाइयां किफायती आवास की श्रेणी में होंगी। वर्ष 2036 से वर्ष 2047 के बीच अतिरिक्त 18 लाख 46 हजार 889 आवास इकाइयों की आवश्यकता का अनुमान है। इनमें 17 लाख 65 हजार 995 इकाइयां किफायती आवास से संबंधित हैं। नीति के अनुमानों के अनुसार 2047 तक दोनों अवधियों को मिलाकर लगभग 39.29 लाख आवास इकाइयों की जरूरत होगी। इनमें करीब 34.83 लाख इकाइयां किफायती आवास की होंगी। नीति का उद्देश्य इस मांग को पूरा करने के लिए सरकारी योजनाओं के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना, खाली पड़ी सरकारी भूमि का उपयोग करना और निर्माण की लागत घटाने वाले उपाय अपनाना है। अब प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के साथ राज्य सरकार एक ऐसे ढांचे की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, जिसमें घर बनाने, खरीदने और किराये पर रहने के विकल्पों को शामिल किया जाए। विभागीय नीति में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों को विशेष महत्व दिया गया है। नीति में परिभाषित आय श्रेणियों के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस में सालाना 3 लाख रुपये तक की आय वाले परिवार शामिल हैं। निम्न आय वर्ग यानी एलआईजी में 3 लाख से 6 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवार रखे गए हैं। मध्यम आय वर्ग की सीमा इस दस्तावेज में 6 लाख से 9 लाख रुपये तक बताई गई है। पात्रता और सहायता के लिए संबंधित सरकारी योजना के प्रचलित दिशा-निर्देश लागू होंगे। किफायती आवास परियोजनाओं में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के लिए मकान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। नीति के अनुसार, किफायती आवास परियोजना में अनुमत कुल निर्मित क्षेत्रफल अनुपात का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा किफायती आवास के लिए निर्धारित किया जाएगा। किफायती आवास इकाई का कारपेट एरिया 60 वर्ग मीटर से अधिक नहीं होगा। ईडब्ल्यूएस मकानों के लिए 30 से 45 वर्ग मीटर का क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे परिवारों के लिए घर के विकल्प बढ़ाना है, जो जमीन की बढ़ती कीमतों और निर्माण लागत के कारण अपना मकान खरीदने या बनाने में कठिनाई महसूस करते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत पात्र आवास इकाइयों के लिए केंद्र सरकार की 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार की 1 लाख रुपये की सहायता की जाएगी। यानी संबंधित पात्रता और योजना के प्रावधानों के अनुसार कुल 2.50 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। ईडब्ल्यूएस इकाइयों के लिए एएचपी मॉडल-1 के तहत 2.50 लाख रुपये की सरकारी सहायता और निजी भूमि पर एएचपी मॉडल-2 के लिए 2.50 लाख रुपये के रिडीमेबल हाउसिंग वाउचर का भी उल्लेख है। वहीं, पात्र एलआईजी और मध्यम आय वर्ग के लाभार्थियों के लिए ब्याज सब्सिडी योजना के तहत प्रति इकाई 1.80 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया जायेगा।
