दीदी कैफे ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
जबेरा में जय मां काली स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मिलकर दीदी कैफे का सफल संचालन किया है। यह कैफे न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल भी बन गया है। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से समूह की महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही हैं। दीदी कैफे का संचालन करने वाली महिलाओं ने बताया कि वे सामग्री की खरीदारी से लेकर भोजन तैयार करने, ग्राहकों को सर्विस देने और काउंटर के हिसाब-किताब तक का कार्य स्वयं संभाल रही हैं। इससे न केवल उनकी आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। आजीविका मिशन के सहायक ब्लॉक प्रबंधक अजय शुक्ला ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दीदी कैफे की शुरुआत की गई है। यह पहल महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सविता रैकवार एवं कृष्णा रैकवार, जो दीदी कैफे की संचालक हैं, ने कहा कि समूह से जुड़ने और ऋण लेकर व्यवसाय शुरू करने के बाद उनके परिवारों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है। अब वे बच्चों की पढ़ाई सहित परिवार की अन्य आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं। दीदी कैफे का संचालन अब महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और स्वावलंबन का प्रतीक बन चुका है। जबेरा में स्थित इस कैफे में चाय, नाश्ता, भोजन सहित विभिन्न खाद्य सामग्री तैयार की जाती है, जिससे स्थानीय लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। महिलाओं का कहना है कि दीदी कैफे उनके लिए केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि यह आत्मसम्मान और समाज में नई पहचान का माध्यम भी बन गया है। यह उनके लिए एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं।

