एफएसएसएआई ने खाद्य उत्पादों पर चेतावनी लेबल लागू करने का आदेश दिया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को खाद्य चेतावनी लेबलिंग के लिए फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल (एफओपीएल) लागू करने का सुझाव दिया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जनहित याचिका के जवाब में संघ सरकार को इस दिशा में कदम उठाने का आदेश दिया है। यह कदम विशेष रूप से मोटापे की समस्या से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है, जहां खाद्य उत्पादों पर स्पष्ट लेबलिंग उपभोक्ताओं को सही निर्णय लेने में मदद कर सकती है। एफओपीएल प्रणाली का एक प्रमुख पहलू ट्रैफिक-लाइट लेबलिंग सिस्टम (टीएलएस) है, जो महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के लिए रंग कोड का उपयोग करता है। यह प्रणाली उपभोक्ताओं को यह जानने में मदद करती है कि किसी खाद्य उत्पाद में पोषण का स्तर उच्च, मध्यम या निम्न है। इससे उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय निर्णय लेने में आसानी होती है और खाद्य उद्योग को उत्पादों के सुधार के लिए प्रोत्साहन मिलता है। हालांकि, दक्षिण पूर्व एशिया के चार देशों — मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस और वियतनाम में एफओपीएल के कार्यान्वयन में उद्योग की दखलअंदाजी के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। वर्ष 2022 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह पाया गया कि इन देशों में एफओपीएल प्रणाली में देरी और कमजोर कार्यान्वयन हुआ है, जिससे उपभोक्ताओं को सही जानकारी नहीं मिल पाई। भारत में मोटापे की समस्या को ध्यान में रखते हुए, हाल ही में एफएसएसएआई ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्ताव में एक लाल हेक्सागोन का उपयोग किया जाएगा, जो उपभोक्ताओं को यह चेतावनी देगा कि खाद्य उत्पाद उच्च वसा, चीनी या नमक (एचएफएसएस) वाले हैं। यह कदम उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक विकल्प चुनने में मदद करेगा। इस बीच, श्रीलंका ने 2016 में शर्करा युक्त पेय पदार्थों के लिए टीएलएस प्रणाली लागू की थी। इसके बाद, 2017 में एक शर्करा कर की शुरुआत की गई और 2019 में एचएफएसएस के लिए टीएलएस का विस्तार किया गया। हाल ही में, श्रीलंका ने एक व्यापक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नीति का भी कार्यान्वयन किया है। एफएसएसएआई ने लेबलिंग नियमों को सख्त करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, जिसमें वसा, चीनी और नमक की मात्रा के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की बात की गई है। यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी नीतियों को भी मजबूत करेगा। हाल ही में, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 ने मोटापे की बढ़ती समस्या के बारे में चिंताएँ उठाई हैं। सर्वेक्षण में यह पाया गया कि पुरुषों में मोटापे के मामले 23 से 27 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 24 से 31 प्रतिशत तक पहुंच गया है। एफएसएसएआई के हालिया हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया है कि उद्योग के कार्यकारी अधिकारियों के साथ एक बैठक के बाद, लेबलिंग नियमों को लेकर कुछ दुरुस्तियाँ की गई हैं। यह बैठक इस दिशा में महत्वपूर्ण थी क्योंकि उद्योग ने चेतावनी लेबलों को भ्रमित करने वाला बताया था। मोटापे से संबंधित रोगों और गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते मामलों के साथ, पोषण लेबलिंग अब एक महत्वपूर्ण नीति हस्तक्षेप के रूप में उभरी है। इस दिशा में अधिक ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि अगली पीढ़ी को स्वस्थ जीवन जीने का अवसर मिल सके।
