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साध्वी हर्षा ने संतों को दोगला कहा, अंजलि अरोड़ा के डांस वीडियो पर उठाए सवाल

साध्वी हर्षा ने संतों को दोगला कहा, अंजलि अरोड़ा के डांस वीडियो पर उठाए सवाल
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साध्वी हर्षा ने संतों को दोगला कहा, अंजलि अरोड़ा के डांस वीडियो पर उठाए सवाल
उज्जैन में साध्वी हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने एक वीडियो जारी कर शंकराचार्य और कुछ संतों पर तीखा हमला किया। उन्होंने उन्हें 'तथाकथित संत' और 'दोगला' बताया। हर्षा ने कहा कि कुछ संत खुद लाइमलाइट में रहना चाहते हैं, इसलिए उन्हें मंच पर काम करने से आपत्ति थी। हर्षा ने वीडियो में यह भी कहा कि उनके खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई शुरू नहीं की गई है, मगर उन्हें लगातार निशाना बनाया गया। उन्होंने संतों के दोगलेपन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह दोगलापन केवल अंजलि अरोड़ा के साथ ही क्यों है, जिसका कोई नकारात्मक अतीत नहीं है। उन्होंने कहा, "क्या मैं जान सकती हूं कि यह दोगलापन उस लड़की के साथ ही क्यों, जिसका ऐसा कोई अतीत ही नहीं था? " हर्षा ने अंजलि अरोड़ा के पुराने डांस वीडियो और सार्वजनिक कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि हर कलाकार को अलग-अलग किरदार निभाने का मौका मिलता है। अंजलि अरोड़ा ने हाल ही में फिल्म 'महाकाव्य रामायण कथा-श्री राम की' में माता सीता की भूमिका निभाई है। हर्षा ने संतों की उस चुप्पी पर सवाल उठाया, जो अंजलि की भूमिका पर उठाए गए सवालों के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि वही संत जो अंजलि के डांस को लेकर आलोचना करते थे, अब उनकी भूमिका पर चुप हैं। हर्षा ने अपने मंच संचालन और एंकरिंग पर उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें 'नचनिया' और 'पाखंडी' तक कहा गया है, लेकिन सवाल पूछना उनका अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरा उद्देश्य किसी आश्रम या संत समाज पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाना था। उन्होंने वीडियो में कहा, "जिन संतों को मैंने देखा है, वे पार्लर खुद आश्रम में बुला लेते हैं और मैनिक्योर-पेडिक्योर करा रहे हैं। " हर्षा ने संतों की दोगलेपन की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह दोगलापन नहीं है तो क्या है? हर्षा ने कहा कि अंजलि के डांस वीडियो को लेकर ट्रोलिंग के बावजूद, हर कलाकार को अपने शौक का पालन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, "लोगों को किसी कलाकार को पसंद या नापसंद करने का अधिकार है। " साध्वी हर्षा ने संतों के दोगलेपन पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या संतों ने जमीर बेच दिया है। उन्होंने संतों को समाज का ठेकेदार बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से समाज में भ्रम फैलता है। हर्षा ने कहा, "मुझे 'नचनिया' और 'पाखंडी' तक कहा गया, लेकिन मैं पूरी तरह मांगने की हकदार हूं। " उन्होंने संतों से अपील की कि वे अपनी सोच को बदलें और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाएं। हर्षा ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल उनके लिए नहीं, बल्कि सभी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने का पूरा हक है।
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