दीपावली केवल दीपों की कतार सजाने, घर-आँगन को रोशन करने और खुशियों के उपहार बाँटने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर झाँकने, मन के अंधकार को मिटाने और समाज में सद्भाव, संवेदना तथा सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने का अवसर भी है। हर वर्ष जब दीपावली आती है, तो चारों ओर दीपों की जगमगाहट, रंग-बिरंगी रोशनी और उत्सव का उल्लास दिखाई देता है। लेकिन इस जगमगाहट के बीच एक सवाल हमें स्वयं से अवश्य पूछना चाहिए कि क्या हमारे मन में भी उतना ही उजाला है, जितना हमारे घरों और बाजारों में दिखाई देता है? भारतीय संस्कृति में दीपक ज्ञान, विवेक, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक रहा है। एक छोटा-सा दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है। मनुष्य का जीवन भी तभी सार्थक होता है, जब वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों का उजाला भरने का प्रयास करे। दुर्भाग्य से आज आधुनिकता और भौतिक प्रतिस्पर्धा की दौड़ में हम त्योहारों के वास्तविक अर्थ से कहीं न कहीं दूर होते जा रहे हैं। दीपावली का उत्सव कई बार दिखावे, महँगी खरीदारी और आतिशबाजी तक सिमट जाता है, जबकि इसकी आत्मा प्रेम, करुणा, सहयोग और सामाजिक एकता में बसती है। समाज में अंधकार केवल रात के समय नहीं होता।
आओ एक दिया समाज के लिए भी जलाएं
याद रखिए, हजारों दीपक जलाने से घर जगमगाता है, लेकिन एक संवेदनशील विचार पूरे समाज को बदलने की ताकत रखता है। दीपावली का वास्तविक प्रकाश तभी फैलेगा, जब हमारे मन में प्रेम, व्यवहार में विनम्रता और कर्मों में सेवा का भाव होगा। इस बार एक दीप अपने लिए, एक परिवार के लिए और एक पूरे समाज के लिए जलाएं। आओ, मन में उजियारा करें और मिलकर समाज को रोशन करें। यही दीपावली का सच्चा उत्सव है, यही मानवता का प्रकाश है और यही एक बेहतर भारत के निर्माण का संकल्प है। भोपाल टुडे परिवार की ओर से आप सभी को प्रकाश, प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता से परिपूर्ण दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

