उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में साधु-संतों से कथित अभद्रता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि मंदिर के कर्मचारी साधुओं के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं और शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। गुरुवार, 5 नवंबर को दर्शन के दौरान जल द्वार पर चेकिंग को लेकर रवींद्र पुरी महाराज की सुरक्षाकर्मियों से बहस हुई थी। उनका कहना था कि मंदिर में उनके साथ बेवजह रोक-टोक और अभद्रता की गई। इस घटना के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्र सरकार तक शिकायत पहुंचाने की बात कही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जल द्वार पर तैनात निरीक्षक जगदीश गोड को ड्यूटी से हटा दिया गया और उनकी जगह निरीक्षक राजू मालवीय को तैनात किया गया। हालांकि, रवींद्र पुरी महाराज संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते थे। उनका मानना था कि केवल ड्यूटी बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक की ओर से उनकी मांग के अनुरूप कार्रवाई न होने पर रवींद्र पुरी महाराज ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को पत्र लिखकर प्रशासक को तत्काल हटाने की मांग की। रवींद्र पुरी महाराज ने अपने पत्र में मंदिर प्रशासन के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के साथ इस तरह का व्यवहार लंबे समय से हो रहा है और उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं। पत्र में उन्होंने 5 नवंबर की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि दर्शन के दौरान प्रोटोकॉल के तहत सहायक प्रशासक भी मौजूद नहीं थे। पत्र के अनुसार, मंदिर कर्मचारियों ने कहा कि प्रशासक के सख्त आदेश हैं कि कोई भी साधु-संत बिना चेकिंग के दर्शन नहीं करेगा, जिसके कारण उनके साथ अनावश्यक रोक-टोक हुई।
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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने प्रशासक को हटाने की मांग की
8 नवंबर 2026 को 8:52 pm बजे

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने प्रशासक को हटाने की मांग की
