पुलिस ने 18,000 रुपये में बेची गई दूसरी भैंस के खरीदार की तलाश शुरू कर दी है, जबकि एक भैंस बरामद कर ली गई है
दमोह जिले के फतेहपुर गांव से दो भैंसों की चोरी के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पटेरा पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि एक भैंस बेची जा चुकी थी, जबकि दूसरी बरामद कर ली गई है। यह घटना 12 अक्टूबर को हुई थी, जब गांव निवासी भानु यादव ने अपनी दो भैंसों के चोरी हो जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। अज्ञात चोरों द्वारा की गई इस वारदात के बाद पुलिस ने तत्काल केस दर्ज कर लिया था और भैंसों की तलाश शुरू कर दी थी। मामले का खुलासा करते हुए थाना प्रभारी रचना मिश्रा ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने पिपरिया निवासी नाथू यादव (52) और चील घाट निवासी लोकराम यादव को पकड़ा। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने ही भानु यादव के घर से दो भैंसों की चोरी की थी। आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए घटना का पूरा विवरण पुलिस को दिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की गई एक भैंस को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। यह बरामदगी पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है, क्योंकि इससे चोरी के माल को वापस लाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा है। भैंस को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है और जल्द ही उसे उसके असली मालिक को सौंप दिया जाएगा। हालांकि, दूसरी भैंस के बारे में पूछताछ करने पर आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने उसे बेच दिया था। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने दूसरी भैंस को 18,000 रुपए में किसी अनजान व्यक्ति को बेच दिया था। यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस अब उस खरीदार का पता लगाने में जुट गई है, जिसने चोरी की भैंस खरीदी थी। चोरी की गई भैंस को बेचने से प्राप्त हुई रकम को लेकर भी आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने 18,000 रुपए आपस में बांट लिए थे। उन्होंने इस रकम को 9-9 हजार रुपए के हिस्सों में बांट लिया था। यह खुलासा आरोपियों के बीच पैसों के बंटवारे को लेकर हुई बातचीत या योजना को दर्शाता है। यह रकम उन्हें भैंस बेचने के बाद मिली थी। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों, नाथू यादव (52) और लोकराम यादव को रविवार को न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जहाँ वे आगे की कानूनी कार्रवाई का सामना करेंगे। यह गिरफ्तारी क्षेत्र में हो रही भैंस चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम कदम है। पटेरा पुलिस अब उस अज्ञात व्यक्ति की तलाश कर रही है जिसने आरोपियों से चोरी की भैंस खरीदी थी। पुलिस उस व्यक्ति को भी कानूनी शिकंजे में लेने की तैयारी कर रही है, क्योंकि चोरी का माल खरीदना भी एक अपराध है। इस खरीदार की पहचान होने से पुलिस को चोरी के पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने में मदद मिल सकती है। इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि क्या इन आरोपियों का कोई गिरोह सक्रिय है या यह उनकी पहली ऐसी घटना थी। पुलिस चोरी के अन्य मामलों से भी इन आरोपियों के कनेक्शन की पड़ताल कर रही है। भैंस चोरी की घटनाओं से किसानों को भारी नुकसान होता है, इसलिए पुलिस इस तरह के अपराधों को गंभीरता से ले रही है। भानु यादव, जो कि फतेहपुर गांव के निवासी हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि अज्ञात लोग उनकी दो भैंसों को चुरा ले गए थे। यह शिकायत 12 अक्टूबर को दर्ज की गई थी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उनकी तलाश शुरू कर दी। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर, पुलिस ने संदिग्धों की पहचान की। इन संदिग्धों में पिपरिया गांव का रहने वाला नाथू यादव, जिसकी उम्र 52 साल बताई गई है, और चील घाट का रहने वाला लोकराम यादव शामिल थे। इन दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। पूछताछ के दौरान, नाथू यादव और लोकराम यादव ने पुलिस को बताया कि उन्होंने ही भानु यादव के घर से दो भैंसों को चुराने की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। उन्होंने चोरी की घटना के समय का भी विवरण दिया और बताया कि कैसे उन्होंने भैंसों को वहां से हटाया। दोनों आरोपियों के बयानों ने मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरोपियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, पुलिस ने एक भैंस को बरामद करने में सफलता हासिल की। यह भैंस चोरी के बाद से ही आरोपियों के कब्जे में थी। पुलिस ने भैंस को सुरक्षित तरीके से जब्त कर लिया है और उसे वापस उसके मालिक तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
