सीहोर में 6 नवंबर से शुरू दीपोत्सव, 8 को स्वाति नक्षत्र में दीपावली का पर्व
सीहोर जिले में दीपोत्सव पर्व 6 नवंबर शुक्रवार से शुरू होकर 11 नवंबर बुधवार तक मनाया जाएगा। 8 नवंबर रविवार को स्वाति नक्षत्र में दीपावली मनाई जाएगी। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, 8 नवंबर रविवार को सुबह 10:23 बजे से 9 नवंबर सोमवार को सुबह 11:01 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी। शास्त्र मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए रविवार शाम को भगवान शिव, शक्ति, नंदन, प्रथम पूज्य भगवान गणेश, माता सरस्वती, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर आदि देवताओं की पूजा-अर्चना की जाएगी। दीपावली के दिन भूमि, भवन, दुकान और नई योजनाओं का शुभारंभ करना श्रेष्ठ होता है। साथ ही, दीपावली की अवधि में बर्तन, वस्त्र, आभूषण और वाहन खरीदना भी शुभ माना गया है, जिसके चलते इस अवधि में अधिकतम वस्तुएं खरीदी जाती हैं। दीपावली पर श्रीयंत्र की विशेष पूजा-अर्चना का भी विधान है। 10 नवंबर सोमवार को स्नान-दान के साथ सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। अमावस्या पर मुख्य रूप से पितरों की पूजा की जाती है। 9 नवंबर सोमवार को प्रतिपदा (एकम) तिथि सुबह 11:02 बजे से प्रारंभ होकर 10 नवंबर मंगलवार को दोपहर 12:09 बजे तक रहेगी। उक्त समयावधि में उदय तिथि में गौ माता पूजन, गोवर्धन पूजा के साथ ही अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, इस दिन गौमाता के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। 11 नवंबर मंगलवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग रहेगा। इस दिन अनुराधा नक्षत्र में भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी सफलता और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन यमुना में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व भी है। दीपावली पूजा का मुहूर्त प्रातः काल अमृत चौघड़िया 10:41 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक रहेगा। शुभ चौघड़िया दोपहर 1:28 बजे से 2:52 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:40 बजे से 7:16 बजे तक रहेगा। गोधूलि बेला शाम 5:20 बजे से 6:10 बजे तक रहेगी। वृषभ लग्न शाम 6:10 बजे से रात्रि 8:11 बजे तक रहेगा। अमृत चौघड़िया रात्रि 7:18 बजे से 8:52 बजे तक रहेगा। सिंह लग्न मध्य रात्रि 12:18 बजे से 2:42 बजे तक रहेगा। यह पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व, जो 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ प्रारंभ हुआ, विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों का केंद्र बिंदु है। धनतेरस पर जहां समृद्धि और आरोग्य की कामना के साथ बर्तनों, धातुओं और नए सामान की खरीददारी की जाती है, वहीं अगले दिन नरक चतुर्दशी पर बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर रविवार को मनाया जा रहा है, जो कि अमावस्या तिथि के संयोग में है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, दीपावली पर विशेष रूप से लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, कुबेर और शिव परिवार की पूजा का विधान है। यह पूजा विशेषतः प्रदोष काल में की जाती है, जब अमावस्या तिथि का संयोग होता है। ऐसी मान्यता है कि इस काल में की गई पूजा अत्यंत फलदायी होती है और घर में सुख-समृद्धि लाती है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य होने के नाते किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में उनकी पूजा आवश्यक है, ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सके। दीपावली के शुभ अवसर पर नए कार्यों का शुभारंभ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
