7 साल से अधिक समय से उज्जैन में पदस्थ अधीक्षकों के तबादलों का विरोध हो रहा है। रविवार दोपहर करीब 2 बजे अधीक्षक और शिक्षक सांसद कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने ज्ञापन सौंपकर मौजूदा पदस्थापना बनाए रखने और तबादले की प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि तबादलों से उनके बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियां प्रभावित होंगी। यह विरोध 30 सितंबर को आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, भोपाल द्वारा जारी किए गए आदेश के बाद शुरू हुआ। इस आदेश के अनुसार, एक ही संस्था में 7 साल से अधिक समय से पदस्थ अधीक्षक-अधीक्षिकाओं को बदला जाना था। कर्मचारियों को अधिकतम 15 पदस्थापनाओं के विकल्प चुनने की सुविधा दी गई थी, और जो आवेदन नहीं करते, विभाग अपने स्तर से नियमानुसार स्थानांतरण कर सकता था। तबादला आदेश के विरोध में एकजुट हुए अधीक्षकों ने चिंता जताई है कि उन्हें 300 से 400 किलोमीटर दूर दूसरे जिलों या संभागों में भेजा जा सकता है। अधीक्षक संघ के सदस्य मुकेश कुमार यादव ने बताया कि उज्जैन में काम कर रहे कई कर्मचारियों को 300 से 400 किलोमीटर दूर दूसरे जिलों या संभागों में भेजे जाने की स्थिति बन रही है। कई कर्मचारी 2018-19 और 2019-20 से उज्जैन में पदस्थ हैं। ऐसे कर्मचारियों के परिवारों में बुजुर्ग माता-पिता और छोटे बच्चों की जिम्मेदारी है, जिनके भरण-पोषण और देखभाल का जिम्मा उन पर है। कर्मचारियों का तर्क है कि शैक्षणिक सत्र के बीच में तबादला होने से बच्चों की पढ़ाई का गंभीर नुकसान होगा। इसके अलावा, परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक ताने-बाने पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने विशेष रूप से उज्जैन जैसे गैर-जनजातीय जिले में इस स्थानांतरण व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इस मामले को लेकर कर्मचारियों ने सांसद और मुख्यमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर तबादला आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगे की कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। मुकेश यादव ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेशभर के अधीक्षकों को एकजुट कर भोपाल में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। यह आंदोलन विभाग की तबादला नीति के खिलाफ विरोध का एक सशक्त माध्यम बनेगा। यह स्थिति जनजातीय कार्य विभाग और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों, आश्रम शालाओं और आवासीय विद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे पर सवाल उठाती है। लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत अधीक्षकों को अचानक हटाने से व्यवस्था में व्यवधान आने की आशंका है। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि तबादलों की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना है कि ऐसे निर्णय लेने से पहले कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों का ध्यान रखना आवश्यक है। इस विरोध प्रदर्शन के बाद, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित विभाग कर्मचारियों की चिंताओं पर कितना ध्यान देते हैं और क्या वे तबादला आदेश में कोई संशोधन करते हैं।
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7 साल से जमे अधीक्षकों के तबादले पर विरोध
25 अक्टूबर 2026 को 11:54 pm बजे
7 साल से जमे अधीक्षकों के तबादले पर विरोध
