मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आम जनता तक उनके लाभ पहुंचाने में हो रही देरी और लापरवाही पर सामान्य प्रशासन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों के प्रमुख सचिवों और जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब संयुक्त परामर्शदात्री समितियों की बैठकें हर तीन महीने में, यानी साल में चार बार, आयोजित करना अनिवार्य होगा। यह कदम तब उठाया गया जब विभाग के संज्ञान में आया कि पहले से जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई विभाग और अधिकारी इन महत्वपूर्ण बैठकों के आयोजन में लगातार उदासीनता बरत रहे थे। सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव रवि मालवीय द्वारा जारी किए गए इस आदेश में कहा गया है कि अब इन बैठकों में भाग लेने वाले सक्षम अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र के दायरे में आने वाले सभी मामलों का मौके पर ही निराकरण करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचे और व्यावहारिक समस्याओं का त्वरित समाधान हो, बैठकों की कार्यवाही और लिए गए निर्णयों का विस्तृत विवरण सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा। जिला स्तर पर गठित होने वाली संयुक्त परामर्शदात्री समितियों में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि, नेता और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य शासन की जनहितकारी और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ आम जनता तक पहुंचाना है। हालांकि, कई विभागों और अधिकारियों की लापरवाही के चलते इन बैठकों का नियमित आयोजन नहीं हो रहा था, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आ रही थी। जीएडी (सामान्य प्रशासन विभाग) ने इस उदासीनता और नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया है। शासन की मंशा है कि बैठकों के माध्यम से प्रशासनिक कसावट लाई जाए और विकास कार्यों व जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की ढिलाई न हो।
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बैठकों में लापरवाही पर विभाग नाराज, साल में 4 बार आयोजन अनिवार्य
8 नवंबर 2026 को 8:52 pm बजे
