सागर के बंडा में जहरीली शराब से 36 लोगों की मौत, परिवारों की आर्थिक स्थिति चिंताजनक, सरकार से स्थाई मदद की गुहार
सागर में जहरीली शराब पीने से जान गंवाने वाले 36 लोगों के परिवारों का दर्द दीपावली से पहले उनके घरों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा गया। दो महीने बीत जाने के बाद भी, इन परिवारों की स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। जिनके साथ पिछले साल त्योहार मनाया था, वे आज दुनिया में नहीं हैं, और रोशनी के पर्व पर घरों में मातम पसरा हुआ है। सरकार ने आर्थिक सहायता के तौर पर 4 लाख रुपये तो दे दिए हैं, लेकिन यह पैसा कब तक चलेगा, यह एक बड़ा सवाल है। परिवारों की सबसे बड़ी चिंता है कि बच्चों की परवरिश कैसे होगी और घर कैसे चलेगा। टीम जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर बंडा के बरमूड़ा और नौराज गांव पहुंची, जहां तीन पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी व्यथा जानी। एक घर में मां-पत्नी मिलकर बीड़ी बना रही हैं। मां का कहना है कि अब सिर्फ चूल्हा जलाने का सवाल नहीं, बल्कि तीन-तीन बेटियों को पालने का है। नौराज गांव में राजेंद्र सिंह लोधी की जहरीली शराब से मौत हो गई थी। दो महीने बीत जाने के बाद भी घर में मातम जैसा माहौल है और कच्चे मकान में सन्नाटा पसरा है। राजेंद्र की तीन मासूम बेटियां शायद इस बात से अनजान हैं कि उनके पिता अब दुनिया में नहीं रहे। मृतक राजेंद्र की मां गुड्डी बाई लोधी से बात करते हुए उनकी पीड़ा छलक उठी। गुड्डी बाई ने बताया कि सरकार ने 4 लाख रुपये का मुआवजा तो दिया है, लेकिन जिस घर का मुखिया ही नहीं रहा, वहां सिर्फ आज के चूल्हे का सवाल नहीं, बल्कि तीन बेटियों के भविष्य का भी सवाल है। उन्होंने चिंता जताई कि 4 लाख रुपये से जिंदगी कैसे कटेगी? बीड़ी बनाकर घर के नमक-तेल का खर्च भी मुश्किल से पूरा होता है, तो तीन-तीन बेटियों की पढ़ाई, कपड़े और उनका पालन-पोषण कैसे होगा? न तो पास में खेती-किसानी के लिए जमीन है और न ही कोई दूसरा सहारा। परिवार की उम्मीद का चिराग बुझ गया है। गुड्डी बाई ने बताया कि उनके दो बेटे थे, जिनमें से एक बाहर रहकर मजदूरी करता है। राजेंद्र सुबह जंगल जाकर बीड़ी की पत्तियां लाता था, लेकिन अब वह भी नहीं रहा। वह बुढ़ापे का सहारा था। अब अगर रात में घर की लाइट भी खराब हो जाए, तो उसे ठीक करने वाला भी कोई नहीं बचा। ऐसे में त्योहार मनाने के लिए घर में बचा ही क्या है? जब घर का चिराग ही बुझ गया, तो दीपावली कैसे मनाएंगे? उन्होंने कहा कि शराब ने पूरा परिवार बर्बाद कर दिया है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई कि अगर उनकी बहू को आंगनबाड़ी में नौकरी मिल जाए, तो बच्चों का पालन-पोषण हो जाएगा। नौराज निवासी करतार सिंह लोधी की भी जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। घर में उनके दो बच्चे और पत्नी हैं। परिवार के लोग दोनों बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। करतार के बड़े भाई कनैई लोधी ने बताया कि वे चार भाई थे और करतार सबसे छोटा था। मजदूरी करके वह परिवार का भरण-पोषण कर रहा था, लेकिन शराब पीने की वजह से सब कुछ बर्बाद हो गया। उसकी मौत के दो महीने बाद भी बहू सदमे में है। परिवार मजदूरी करता है, ऐसे में उसके बच्चों को कैसे पालेंगे, यह बड़ी चिंता है। कनैई लोधी ने मांग की है कि सरकार उनकी बहू को आंगनबाड़ी में नौकरी दे और बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था कराए, ताकि उनका भविष्य सुधर सके। मृतक करतार सिंह के घर पर मातम का माहौल पसरा हुआ है। इसी तरह, बमूराभेड़ा निवासी सुमेर सिंह की भी जहरीली शराब पीने से मौत हुई थी। घर में उनकी पत्नी, 8 साल का बेटा और 11 साल की बेटी हैं। परिवार के पास 4 एकड़ जमीन है। सुमेर अपने परिवार के साथ अलग रहते थे, और उनके बड़े भाई अलग रहते थे, जिससे सुमेर का परिवार अकेला पड़ गया था। इस बार फसल भी बर्बाद हो गई। मुआवजा तो मिला है, लेकिन उससे परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है। परिवार के लोग, जो अलग रहते हैं, कब तक सहयोग कर पाएंगे, क्योंकि उन्हें भी अपना परिवार पालना है। परिवार ने कहा कि सरकार परिवार को जीवन यापन करने की स्थाई व्यवस्था कराए, ताकि बच्चों का भविष्य सुधर पाए। त्योहार सामने हैं, लेकिन सुमेर के जाने के बाद घर की न तो छपाई हो पा रही है और न ही अन्य व्यवस्थाएं। त्योहार मातम में मनाए जा रहे हैं। सुमेर सिंह के घर पर सन्नाटा पसरा रहता है। यह जहरीली शराबकांड एक सिलसिलेवार घटनाक्रम के तहत सामने आया। 5 सितंबर को बंडा सिविल अस्पताल में उल्टी, शरीर में अकड़न, नीला पड़ने और आंखों की रोशनी कम होने जैसे लक्षणों वाले मरीज पहुंचने लगे। 5 सितंबर की रात को तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल और तत्कालीन एसपी अनुराग सुजानिया बंडा पहुंचे और मरीजों को जिला अस्पताल और बीएमसी रेफर करवाया। 6 सितंबर की सुबह तक 9 मौतें हो चुकी थीं, और शाम तक मृतकों की संख्या 15 के पार पहुंच गई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। 7 सितंबर को मौतों का आंकड़ा 22 के पार हो गया। पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर अवैध और जहरीली शराब जब्त की। 8 सितंबर को दो और मौतें हुईं, और गांवों में पुलिस गश्त और मुनादी शुरू हुई। नए मरीजों की संख्या घटने लगी। 9 सितंबर तक कोई नया मरीज या मौत सामने नहीं आई। पुलिस ने 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया और अवैध शराब जब्त की। 10 सितंबर को आरोपी चंद्रभान सिंह राजपूत, मनीष लोधी और आशीष साहू के अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए। 11 सितंबर को फरार आरोपी रवि लखेरा की बरायठा के जंगल में घेराबंदी की गई और शॉर्ट एनकाउंटर में उसे पकड़ा गया। कुल मौतों की बात करें तो इस बीच, जहरीली शराब से 36 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। शराबकांड में 52 आरोपी बनाए गए, जिनमें से करीब 34 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि शेष फरार आरोपियों की पुलिस टीमें तलाश कर रही हैं। घटनाक्रम सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान मामले में 52 आरोपी बनाए गए। जिसमें से लगातार कार्रवाई करते हुए करीब 34 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। शेष फरार आरोपियों की पुलिस टीमें तलाश कर रही हैं। यह खबरें भी पढ़ें… एमपी शराबकांड के दो आरोपियों का एनकाउंटर सागर के बंडा शराबकांड मामले में फरार मुख्य आरोपी मनीष लोधी और आशीष साहू को पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया है।
